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SIPRI की रिपोर्ट में खुलासा : परमाणु हथियार पर भारत की नीति में अहम बदलाव, पहली बार 12 न्यूक्लियर वॉरहेड्स तैनात

SIPRI की रिपोर्ट में खुलासा : परमाणु हथियार पर भारत की नीति में अहम बदलाव, पहली बार 12 न्यूक्लियर वॉरहेड्स तैनात

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नई दिल्ली, 9 जून। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट पर भरोसा करें तो भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर वॉरहेड्स को ‘तैनात’ की श्रेणी में रखा है, जो उसकी न्यूक्लियर रणनीति में एक अहम बदलाव है। यह रिपोर्ट नई दिल्ली की उस पुरानी परंपरा से अलग हटकर है, जिसके तहत न्यूक्लियर वॉरहेड्स को उनके डेलिवरी सिस्टम से अलग रखा जाता था।

पहले न्यूक्लियर वॉरहेड्स को उनके डेलिवरी सिस्टम से अलग रखा जाता था

SIPRI का कहना है कि भारत के न्यूक्लियर हथियारों के जखीरे को अब सिर्फ जमा करके रखने के बजाय ऑपरेशनल तौर पर तैनात माना जा रहा है। इस कदम का मतलब है कि लॉन्च के लिए तैयार हथियारों को जमीन के नीचे बने मिसाइल साइलो और नई न्यूक्लियर-पावर्ड पनडुब्बियों में तैनात किया गया है, जो ऑपरेशनल तैयारी के ऊंचे स्तर को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा परमाणु वॉरहेड्स को डेलिवरी सिस्टम के साथ जोड़ने या उन्हें सक्रिय ऑपरेशनल फोर्स वाले बेस पर तैनात करने का यह पहला ज्ञात मामला है।

2025 में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश रहा

SIPRI की इस रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश रहा, जिसने रक्षा के लिए 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर आवंटित किए। रिपोर्ट में मई, 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच ‘असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट’ का भी जिक्र किया गया है।

जनवरी, 26 तक पाक के 170 के मुकाबले भारत के पास 190 परमाणु हथियार थे

इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि जनवरी, 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार थे जबकि पाकिस्तान के पास 170 थे। संस्था ने बताया कि पिछले वर्ष भारत ने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में थोड़ी बढ़ोतरी की और एडवांस्ड डेलिवरी सिस्टम विकसित करना जारी रखा। साथ ही, भारत ने पाकिस्तान पर ध्यान बनाए रखते हुए चीन तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम लंबी दूरी की क्षमताओं पर भी जोर दिया।

प्रमुख देश राष्ट्रीय ताकत के साधन के तौर पर परमाणु हथियारों पर ज्यादा निर्भर हो रहे

SIPRI ने कहा, ‘SIPRI ईयरबुक 2026 की मुख्य बात यह है कि देश राष्ट्रीय ताकत के साधन के तौर पर परमाणु हथियारों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। इससे परमाणु हथियारों की संख्या और भूमिका को कम करने की दशकों की कोशिशें उलट रही हैं, जबकि गलत आकलन और तनाव बढ़ने का खतरा भी बढ़ रहा है।’

पाकिस्तान अपने डेलिवरी सिस्टम को बेहतर बनाने में जुटा है

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अपने डेलिवरी सिस्टम को बेहतर बनाने और विखंडनीय सामग्री (fissile material) का भंडार जमा करने का काम जारी रखे हुए है, जिससे भविष्य में उसके परमाणु हथियारों के जखीरे का विस्तार हो सकता है। इसमें यह भी देखा गया कि मई, 2025 में हुए संक्षिप्त संघर्ष के दौरान, भारत ने पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेस पर हमला किया, जिनके बारे में माना जाता है कि वे परमाणु गतिविधियों से जुड़े थे। हालांकि दोनों देशों ने तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाए।

9 परमाणु-सक्षम देशों के पास वर्ष की शुरुआत में लगभग 12,187 परमाणु हथियार थे

दुनियाभर में 2026 की शुरुआत में नौ परमाणु-सक्षम देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु हथियार थे। SIPRI ने यह भी बताया कि दुनियाभर में सैन्य खर्च लगातार 11वें साल बढ़ा और 2025 में रिकॉर्ड 2.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, भारत और पाकिस्तान दुनिया के शीर्ष हथियार आयातकों में शामिल थे और उन्होंने पहली बार संघर्ष में साइबर ऑपरेशन्स को भी शामिल किया।

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