नई दिल्ली, 29 जुलाई। लोकसभा में बुधवार को अपराह्न विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके साथ ही विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। अब यह बिल चर्चा के लिए राज्यसभा में रखा जाएगा।
#MonsoonSession2026#LokSabha passes the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026.
The Bill amends the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, with the objective of further strengthening the legal framework to prevent paper… pic.twitter.com/vKdvn6RWN4
— SansadTV (@sansad_tv) July 29, 2026
सार्थक सुझाव देने के बजाय मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा विपक्ष
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सबसे पहले विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।’
Union Minister @DrJitendraSingh replies on the discussion on the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 in Lok Sabha .
That the Bill to amend the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024.@LokSabhaSectt… pic.twitter.com/nHHNAgLxnb
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विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को ‘मूर्ख’ कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को ‘मूर्ख’ कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है।”
केंद्रीय मंत्री ने गत 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए। ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए। जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए।’
जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता
सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, ‘बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।’


