नई दिल्ली, 29 जुलाई। सर्वोच्च न्यायालय ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ जारी समन के आदेश को भी पूरी तरह रद कर दिया। हालांकि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 27 दिसम्बर 2024 को हो चुका है, लेकिन इस फैसले के बाद उन्हें कानूनी रूप से इस बड़े आपराधिक मामले से पूरी तरह बरी मान लिया गया है।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मिली मंजूरी
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट को सही माना, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने और मनमोहन सिंह को समन भेजने का कोई ठोस या जरूरी कारण नहीं था।
निधन के बाद भी मेरिट पर हुआ फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण इस मामले को बिना किसी फैसले के भी बंद किया जा सकता था। लेकिन अदालत ने कानून और न्याय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए सीबीआई की दोनों जांच रिपोर्टों की बारीकी से समीक्षा की।
शीर्ष कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी को पूर्व पीएम के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे, इसलिए विशेष जज का उन्हें आरोपित के रूप में बुलाना सही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी अदालती प्रक्रियाओं को खारिज करते हुए केस को मेरिट के आधार पर हमेशा के लिए बंद कर दिया।
ओडिशा के ‘तालाबीरा-II’ कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था मामला
यह पूरा विवाद साल 2005 में ओडिशा के ‘तालाबीरा-II’ कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार भी था। एक विशेष अदालत ने इस आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, जाने-माने उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। हालांकि मनमोहन सिंह ने हमेशा इस मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था।
