लखनऊ, 27 अगस्त। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
इस वर्ष जन्माष्टमी की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। इसकी वजह अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समय का अलग-अलग होना है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 की देर रात 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर को दोपहर 12:13 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर कई स्थानों पर जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि वैष्णव संप्रदाय के लोग 5 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।
जन्माष्टमी 2026 पर निशिता पूजा का समय
जन्माष्टमी की पूजा रात के निशिता काल में करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था। इस बार निशिता पूजा मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक रहेगा। इसी दौरान भक्त लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान कर व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं। इसके बाद दिनभर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, भजन और कीर्तन किया जाता है। रात में निशिता काल के दौरान विशेष पूजा की तैयारी की जाती है। पूजा के दौरान सबसे पहले लड्डू गोपाल का दूध, दही, शहद, घी और जल से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें स्वच्छ या नए वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है और आरती की जाती है। इसके बाद लड्डू गोपाल को फूलों से सजे झूले में विराजमान कर झूला झुलाने की परंपरा है।
5 सितंबर को व्रत पारण का समय
जो भक्त जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे, वे 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह 5:47 बजे बताया गया है। हालांकि, व्रत खोलने का सही समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तय करना उचित माना जाता है।
जन्माष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी के व्रत को बेहद पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण का व्रत एवं पूजन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।


