पटना, 27 अगस्त। नेपाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद बिहार में गंडक नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने गुरुवार को सीमावर्ती इलाकों बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया और मोतिहारी का दौरा किया और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित खतरे, सुरक्षा व्यवस्था, एहतियाती उपायों तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को गंडक के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा।
गंडक बैराज पर तेजी से बढ़ा जलश्राव
जल संसाधन विभाग के अनुसार, 26 अगस्त की रात 11 बजे गंडक नदी का जलश्राव 1,50,200 क्यूसेक के पीक स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद जलश्राव में लगातार कमी दर्ज की गई, लेकिन देवघाट क्षेत्र में देर से हुई बारिश के कारण नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी का रुझान सामने आया है।
गंडक बैराज पर गुरुवार सुबह जलश्राव में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सुबह 5:30 बजे — 81,800 क्यूसेक
सुबह 6 बजे — 88,300 क्यूसेक
सुबह 7 बजे — 92,900 क्यूसेक
सुबह 8 बजे — 99,800 क्यूसेक
सुबह 9 बजे — 1,04,400 क्यूसेक
इस तरह कुछ ही घंटों में गंडक बैराज पर जलश्राव में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
तटबंधों पर फिलहाल नहीं दिखा प्रतिकूल असर
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, फिलहाल गंडक नदी के तटबंधों पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया है। विभागीय अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
गंगा का जलस्तर घटने के रुझान में
वहीं, गंगा नदी का जलस्तर फिलहाल घटने के रुझान में है। हालांकि, कुछ स्थानों पर जलस्तर में एक से दो सेंटीमीटर तक मामूली बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। जल संसाधन विभाग ने कहा कि बाढ़ सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। नदियों और तटबंधों की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।


