नई दिल्ली, 12 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को यहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) से इतर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में विदेश मंत्री डॉ.एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी शामिल हुए।
PM @narendramodi welcomed President Xi Jinping in New Delhi for the BRICS Summit.
Both leaders had a productive meeting on the sidelines, where they reviewed the steady progress in India-China relations since their last meeting in Tianjin. They underscored the importance of… pic.twitter.com/H3uJLgCROf
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 12, 2026
पीएम मोदी ने जिनपिंग का किया स्वागत
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें उनका अभिनंदन करते हुए बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन की ओर से दिए गए सकारात्मक वक्तव्य के लिए भी आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें द्विपक्षीय सहयोग पर बात करने का एक बार फिर मौका मिल रहा है।’
विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद बताया कि इस शीर्षस्तरीय मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और एक-दूसरे के बाजारों तक सार्थक एवं पूर्वानुमेय पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को संतुलित एवं टिकाऊ बनाने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
लोगों के बीच संपर्क और व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
संरचनात्मक व्यापार असंतुलन दूर करने पर सहमति
आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर, भरोसेमंद और पूर्वानुमेय पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों के समाधान की आवश्यकता पर सहमति जताई।
लगभग 7 वर्ष बाद भारत आए हैं शी जिनपिंग
लगभग सात वर्षों बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। साथ ही, यह लगातार तीसरा वर्ष है जब पीएम मोदी व राष्ट्रपति शी की मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन में हुई थी।
रणनीतिक दृष्टिकोण से संबंध आगे बढ़ाने की बात
बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद वे साझा विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन करने में सक्षम रहे हैं।
पीएम मोदी ने चीन के सहयोग के लिए जताया आभार
पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग और समर्थन के लिए राष्ट्रपति शी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर है।
112 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ व्यापार घाटा
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया जबकि 2024-25 में यह 99.21 अरब डॉलर था। बढ़ते व्यापार घाटे ने दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने की जरूरत को प्रमुख बना दिया है।
चीन को भारत का निर्यात भी बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 36.62% बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा जबकि चीन से आयात 16.03% बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा और बढ़ गया।
151 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार
इसी अवधि में भारत और चीन के बीच कुल वस्तु व्यापार 18.31% बढ़कर 151.10 अरब डॉलर पहुंच गया। चीन इसके साथ ही अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। हालांकि, व्यापार असंतुलन केवल उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ा मुद्दा नहीं है। भारत, चीन से बड़ी मात्रा में औद्योगिक कच्चा माल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर और पूंजीगत सामान आयात करता है, जिनका इस्तेमाल भारतीय उद्योगों में उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए होता है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आयात में चीन की बड़ी हिस्सेदारी
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कम्प्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे चार प्रमुख क्षेत्र भारत के चीन से होने वाले आयात का करीब 66% हिस्सा हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का करीब 43% और मशीनरी एवं कंप्यूटर आयात का करीब 40% चीन से करता है।
महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता
रिपोर्ट के अनुसार, भारत छह महत्वपूर्ण खनिजों की अपनी जरूरत का 40% से अधिक हिस्सा चीन से आयात करता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन चीन पर काफी हद तक निर्भर रहती है। ऐसे में चीन की ओर से इन महत्वपूर्ण निर्यातों पर रोक या प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में भारत की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाने की चीन की उम्मीद
चीन इसके साथ ही भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद कर रहा है, ताकि उसकी कम्पनियां तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अधिक निवेश कर सकें। ऐसे में दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच, निवेश और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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ब्रिक्स के पहले दिन साझा बयान पर बनी सहमति
इस बीच 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला दिन भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा। सदस्य देशों ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर सहमति जताते हुए साझा बयान जारी किया। बयान में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने, पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने और टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने पर जोर दिया गया।
पश्चिम एशिया संकट पर चीन ने जताई चिंता
वहीं चीनी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार नई दिल्ली में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया और गल्फ क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता कायम करने में चीन की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन इस दिशा में अपनी उचित भूमिका निभाना चाहता है और ब्रिक्स के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
युद्ध से क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान
राष्ट्रपति शी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के लिए भी उचित नहीं बताया और शांति एवं स्थिरता कायम करने के लिए प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।


