अयोध्या, 15 सितंबर। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर मीडिया में चल रही कुछ खबरों को गलत बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है। न्यास के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी की ओर से जारी बयान में चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजी तथ्यों को सार्वजनिक किया गया है। न्यास ने कहा कि चयन प्रक्रिया को लेकर सामने आ रही गलत जानकारी को दूर करने के लिए तथ्यों को स्पष्ट किया जा रहा है। बयान के मुताबिक, 6 जुलाई 2026 को CEO के चयन के लिए खोज समिति का गठन किया गया था।
5,585 आवेदन मिले
न्यास के अनुसार, खोज समिति को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत जांच की गई। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर में एआई स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल विशेषज्ञ मूल्यांकन भी किया गया।मूल्यांकन के बाद 16 प्रत्याशियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। इन उम्मीदवारों ने 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में आमने-सामने की बातचीत और साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
जितेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त को दिया इंटरव्यू
न्यास ने स्पष्ट किया कि एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त 2026 को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। खोज समिति ने इसके बाद 1 सितंबर 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को सौंप दीं।
इन तीन नामों की हुई थी सिफारिश
बयान के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को न्यास ने अनुशंसित शीर्ष तीन प्रत्याशियों के नाम मीडिया के सामने सार्वजनिक किए। इनमें जितेंद्र मिश्र, संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज के नाम शामिल थे। न्यास ने कहा कि जितेंद्र मिश्र के 11-12 अगस्त को साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल नहीं होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। शीर्ष तीन अनुशंसित प्रत्याशियों में उनका शामिल होना उनकी साक्षात्कार प्रक्रिया में भागीदारी, मूल्यांकन और योग्यता आधारित चयन का दस्तावेजी प्रमाण है।
‘चयन प्रक्रिया पारदर्शी और दस्तावेजीकृत’
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने कहा कि CEO की चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के उच्च मानकों के अनुरूप आयोजित की गई। न्यास के मुताबिक, प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का दस्तावेजीकरण किया गया था और अंतिम उम्मीदवारों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई थी। न्यास ने अपनी पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी जांच के लिए वह तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराता रहेगा।


