अयोध्या, 11 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। ट्रस्ट ने राम वेद विद्यालय, कारसेवकपुरम के प्रधानाचार्य आचार्य इंद्रदेव मिश्र को दिसंबर 2026 तक राम मंदिर का व्यवस्था प्रमुख नियुक्त किया है। आचार्य इंद्रदेव मिश्र मंदिर में होने वाले नित्य पूजन, यज्ञ सहित अन्य वैदिक अनुष्ठानों की व्यवस्थाएं संभालेंगे। इसके अलावा धार्मिक समिति के निर्देशानुसार मंदिर में आयोजित होने वाले विभिन्न उत्सवों और कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी।
नरपत डुकिया के सहयोगी के रूप में करेंगे काम
ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मंदिर के समग्र संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी पहले से ही नरपत डुकिया को सौंपी गई है। ऐसे में आचार्य इंद्रदेव मिश्र मंदिर की व्यवस्था में उनके सहयोगी के तौर पर काम करेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि आचार्य इंद्रदेव मिश्र लंबे समय से वेद नारायण की सेवा में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के वैदिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न और सुचारु व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विद्वता और कार्यकुशलता को देखते हुए मिली जिम्मेदारी
ट्रस्ट ने आचार्य इंद्रदेव मिश्र की विद्वता, योग्यता और कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें दिसंबर 2026 तक व्यवस्था प्रमुख का दायित्व सौंपा है। उनकी जिम्मेदारी में मंदिर में होने वाले नित्य पूजन, यज्ञ और अन्य वैदिक अनुष्ठानों की व्यवस्था के साथ धार्मिक समिति के निर्देश पर आयोजित होने वाले उत्सवों और कार्यक्रमों का सफल संचालन सुनिश्चित करना शामिल है।
विद्यालय के कार्य प्रभावित न हों, इसलिए अलग समय में संभालेंगे जिम्मेदारी
आचार्य इंद्रदेव मिश्र वर्तमान में राम वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य का दायित्व भी संभाल रहे हैं। इसे देखते हुए ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह मंदिर की अतिरिक्त जिम्मेदारी विद्यालय के नियमित कार्य समय के अतिरिक्त निभाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राम वेद विद्यालय की नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूप
ट्रस्ट के इस निर्णय को राम मंदिर में प्रतिदिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक कार्यक्रमों और विभिन्न उत्सवों की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आचार्य इंद्रदेव मिश्र की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं तक केंद्रित रहेगी।











