वाशिंगटन, 11 जुलाई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना रुख और सख्त करते हुए मिडिल ईस्ट में हुए नुकसान और मौतों के लिए तेहरान से मुआवजे की मांग की है। ट्रंप ने कहा कि लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में हुए नुकसान और जानमाल की क्षति के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग दोहराई
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि ईरान अब अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहा है, लेकिन तेहरान ने पहले हुई किसी बातचीत या बैठक में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजा मांग रहा है, जो उसके हमलों और संघर्षों में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें यूएसएस कोल पर हुए हमले में मारे गए लोगों के परिवार और विभिन्न संघर्षों में जान गंवाने वाले हजारों अन्य लोग भी शामिल हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को पिछले पांच दशकों के दौरान वहां मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों को भी मुआवजा देना चाहिए। ट्रंप ने अपने बयान में पिछले पांच महीनों में मारे गए 52,000 लोगों के लिए भी मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में इस मांग को शामिल करने का निर्देश दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बढ़ा तनाव
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बढ़ा हुआ है। इससे पहले तेहरान की ओर से कहा गया था कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को मुआवजा देना होगा। इसके जवाब में ट्रंप ने अब ईरान के साथ किसी भी संभावित बातचीत के लिए मुआवजे की मांग को अपनी नई शर्त के तौर पर सामने रखा है।
ईरान ने सैन्य क्षमता मजबूत करने पर दिया जोर
वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने देश की सैन्य और सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने ईरान की सेना और बासिज की रक्षात्मक क्षमता तथा तैयारियों को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ईरान को देश के खिलाफ किसी भी स्तर और किसी भी तरह के पारंपरिक या आधुनिक खतरे का समय पर, प्रभावी और मजबूत जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
खामेनेई ने सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के बीच एकीकरण को पूरा करने को भी प्रमुख लक्ष्य बताया। उनके इस रुख से संकेत मिलता है कि ईरान मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच अपनी सैन्य और सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

