AAP को जबर्दस्त झटका : सांसद राघव चड्ढा का इस्तीफा, बोले – दो तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में होंगे शामिल
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) को जबर्दस्त झटका लगा, जब पिछले कुछ माह से AAP नेताओं के निशाने पर रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को पार्टी से अपने इस्तीफे का ही एलान कर दिया। उन्होंने साथ ही यह भी घोषणा कर दी कि वह पार्टी के दो तिहाई सांसदों के साथ जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे।
राघव चड्ढा ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारी मन से कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने अपनी स्थिति तय करते हुए कहा, ‘मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता की ओर बढ़ रहा हूं।’
खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी‘ बताया
राघव ने एक बेहद चुटीली और सीधी टिप्पणी करते हुए खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।
उन्होंने बताया, ‘दो तिहाई से ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसद हमारे साथ हैं। उन्होंने साइन भी कर दिया है। इसमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित अन्य नेता शामिल हैं।’

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में AAP के पास राज्यसभा में 10 सांसद (सात पंजाब से और तीन दिल्ली से) हैं। राघव चड्ढा, संदीप सिंह और अशोक मित्तल आज ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करके औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे।
‘मैं गलत पार्टी में सही आदमी…‘
संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, ‘हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को बीजेपी में मिला लेंगे।’
उन्होंने आगे कहा, ‘AAP को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, लेकिन पार्टी अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है। पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। इसलिए, आज हम यह ऐलान करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।’
दिल्ली चुनाव के दौरान स्वाति मालीवाल भी बगावती रुख अपना चुकी थीं
इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान स्वाति मालीवाल भी बगावती रुख अपना चुकी थीं। अब राघव, संदीप और अशोक के जाने से अरविंद केजरीवाल की राज्यसभा में ताकत आधी से भी कम रह गई है। इस बड़ी टूट ने आम आदमी पार्टी के भविष्य और उसकी सांगठनिक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बगावत के पीछे दिल्ली चुनाव में हुई पार्टी की हार एक बड़ी वजह रही है। दिल्ली की विफलता के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक को हाशिए पर धकेल दिया था। चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में पाठक को अहम फैसले लेने वाली प्रक्रियाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था।
संदीप पाठक 2022 के पंजाब चुनाव अभियान के दौरान लाइमलाइट में आए थे। साल 2022 से 2024 के आखिरी तक पाठक ही ‘AAP’ के अंदर हर बड़ी रणनीतिक फैसला लेते थे। हालांकि, बाद में उन्हें सिर्फ छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर सीमित कर दिया गया, जबकि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को पंजाब, आतिशी को गोवा और गोपाल राय व दुर्गेश पाठक को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई।
