राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया दान का लेखा-जोखा, बताया- कहां खर्च हुए 2761 करोड़ रुपये, बाकी बैंक के पास

अयोध्या, 6 जुलाई। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा व दान चोरी को लेकर मचे बवाल के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में ट्रस्ट ने दान में मिली रकम और उसे खर्च किए जाने का विस्तार से ब्योरा दिया है।

निधि योगदान अभियान और कार्पस दान के जरिए कुल 3,264 करोड़ मिले

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) ने बताया कि निधि योगदान अभियान और कार्पस दान के जरिए कुल 3,264 करोड़ रुपए मिले थे। इनमें से 2,370 करोड़ रुपयों का इस्तेमाल निर्माण और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए किया गया।

मंदिर की स्थापना से लेकर 31 मार्च, 2026 तक दान में कुल 582 करोड़ मिले

राम मंदिर की स्थापना से लेकर 31 मार्च, 2026 तक कुल 582 करोड़ रुपये का दान मिला, जिसमें से 391 करोड़ रुपये परिचालन व्यय (operating expenses) के रूप मं खर्च हुए। बाकी धनराशि बैंक खातों में उपलब्ध है। ट्रस्ट ने इस तरह कुल 2761 करोड़ रुपये खर्च के बारे में जानकारी दी है।

अपने दान के उपयोग की जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक भक्त अयोध्या आकर स्वयं सत्यापन कर लें

विज्ञप्ति में बताया गया है कि कैश के अलावा कई श्रद्धालुओं ने रामलला को कीमती वस्तुएं भी भेंट कीं। ऐसे कुल 2926 दान प्राप्त हुए हैं। इन सभी का पूरा विवरण, प्राप्ति तिथि सहित एक रजिस्टर में दर्ज किया गया है और एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म द्वारा आंतरिक लेखा परीक्षक के रूप में वार्षिक भौतिक सत्यापन किया जाता है। जो भक्त अपने दान के उपयोग की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं या उसके बारे में जानकारी लेना चाहते हैं, उनसे अनुरोध है कि वे ट्रस्ट के अधिकारी से समय लेकर अयोध्या आएं और स्वयं सत्यापन कर लें।

ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्र के इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया। न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में अनियमितता से ट्रस्टी आहत और चिंतित हैं और इस दुर्भाग्यकारी प्रकरण पर गंभीर खेद व्यक्त करते हैं।

गोविंद देव ने बताया कि एसआईटी की शुरुआती जांच में आठ लोगों के नाम आए, जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मिले। उनके खिलाफ ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत कठोरतम दंड मिलना चाहिए। एसआईटी का कार्यक्षेत्र सिर्फ जांच तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह सुझाव देना भी है कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में क्या आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए जिससे व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, मजबूत और पारदर्शी हो सके।

ट्रस्ट ने गोपाल नागरकोटे को विशेष आमंत्रितों की सूची से हटाने का भी निर्णय

विज्ञप्ति में कहा गया है एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्र ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है। उनके इस्तीफों को सोमवार की बैठक में विचार के लिए रखा गया था। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच और नैतिक आधार पर दिए गए दोनों के इस्तीफों को स्वीकार कर लिया है। साथ ही ट्रस्ट ने गोपाल नागरकोटे को विशेष आमंत्रितों की सूची से हटाने का भी निर्णय लिया है। ट्रस्ट का मानना ​​है कि कानूनी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी। तब तक किसी पर भी दोषारोपण करना सही नहीं है।

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