जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंचीं विवादित किताबें, UAPA के तहत केस दर्ज; सरकार ने वापस मंगाईं सभी प्रतियां
श्रीनगर, 6 जुलाई। जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो पुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इन किताबों में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों और अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन किया गया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह विवाद तब सामने आया जब जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (JKPF) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इन पुस्तकों की सामग्री पर सवाल उठाए। इसके बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन हरकत में आ गए।
किन किताबों पर है विवाद?
विवाद के केंद्र में दो पुस्तकें हैं—
‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ J&K’, लेखक: हिलाल अहमद और संतोष मीना (प्रकाशक: ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू)
‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’, लेखक: सुशांत गिरी (प्रकाशक: अनुराग प्रकाशन, दिल्ली)
आरोप है कि इन पुस्तकों में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के सह-संस्थापक मकबूल भट को ‘शहीद’ बताया गया है, जबकि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक को प्रभावशाली व्यक्तित्व और घाटी की “आखिरी उम्मीद” जैसे शब्दों से प्रस्तुत किया गया है।
‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत स्कूलों में पहुंचीं किताबें
अधिकारियों के अनुसार, इन पुस्तकों का चयन ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए किया गया था। बताया गया कि 364 प्रकाशकों की पुस्तकों की समीक्षा के बाद विशेषज्ञों की चार समितियों ने इनका चयन किया था। ये पुस्तकें जम्मू-कश्मीर के 1,832 सरकारी और 394 पीएम श्री स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई थीं। विवाद सामने आने से पहले एक पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर के स्कूलों में तथा दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के स्कूलों में वितरित की जा चुकी थीं।
सरकार ने उठाए कई सख्त कदम
विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग और सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी वितरित प्रतियों को वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दोनों पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू-कश्मीर में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। उनकी अन्य प्रकाशित सामग्री की भी समीक्षा और वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की जांच के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसे 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। वहीं, पुलिस द्वारा UAPA की धारा 13 तथा BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने जम्मू स्थित संबंधित प्रकाशक के कार्यालय पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
पूर्व डीजीपी ने जताई चिंता
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने कहा कि अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन नई पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनके अनुसार, ऐसी सामग्री युवाओं के बीच गलत संदेश देने का खतरा पैदा करती है और इसकी गंभीर जांच होनी चाहिए।
भाजपा ने सरकार को घेरा
इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं ने इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने चयन प्रक्रिया की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई है। फिलहाल पुलिस, शिक्षा विभाग और गठित जांच समिति पूरे मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
