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लखनऊ अग्निकांड : प्रारंभिक जांच के बाद बिल्डिंग मालिक सहित 4 लोग गिरफ्तार

लखनऊ अग्निकांड : प्रारंभिक जांच के बाद बिल्डिंग मालिक सहित 4 लोग गिरफ्तार

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लखनऊ, 22 जून। राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक बिल्डिंग में सोमवार को अपराह्न हुए भयावह अग्निकांड में पुलिस ने बड़ी काररवाई की है और प्रारंभिक जांच के बाद बिल्डिंग मालिक सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि इस मामले में छह लोगों पर FIR दर्ज की गई है।

6 नामजद अभियुक्तों सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज

इस मामले में थाना अलीगंज में बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत छह नामजद अभियुक्तों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला और एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के फाउंडर तुषांक कृष्णा जायसवाल, रामकृष्ण उपाध्याय (एनिमेशन स्टूडियो मैनेजर) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

गौरतलब है कि बिल्डिंग में संचालित कोचिंग संस्थान में अध्ययनरत 15 छात्र-छात्राओं की जान इस दर्दनाक हादसे में चली गई। सात अन्य घायलों का केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज जारी है।

चार अधिकारी भी निलंबित

इस मामले में चार अफसरों को भी निलंबित कर दिया गया है। हादसे के बाद सीएम योगी ने अलीगढ़ व हाथरस के अपने सभी कार्यक्रम रद कर दिए लखनऊ लौटने के बाद सीधे घटनास्थल का दौरा किया। वह केजीएमयू भी गए और इलाजरत मरीजों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। सीएम योगी ने हादसे की सख्त जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सोमवार देर शाम हादसे को लेकर हाईलेवल मीटिंग भी की।

जांच के लिए SIT का गठन

इस बीच राज्य सरकार ने अग्निकांड की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह फैसला हादसे को लेकर की गई हाई लेवल रीव्यू मीटिंग के बाद लिया गया। एसआईटी में अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग) और प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन को सदस्य बनाया गया है। जांच दल को घटना के सभी पहलुओं की गहन जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका तय करने का निर्देश दिया गया है।

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सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी SIT

सरकार ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। जांच के दौरान आग लगने के कारणों, भवन में सुरक्षा मानकों के पालन, वैधानिक स्वीकृतियों और किसी भी प्रकार की संभावित लापरवाही की पड़ताल की जाएगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त काररवाई की जाएगी।

विवादों में भी रही है बिल्डिंग

पता चला है कि जिस इमारत में आग लगी थी, उसे लेकर पूर्व में विवाद भी हो चुका है। अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का कुल क्षेत्रफल 1992 वर्गफुट है और इसके लिए 20 अगस्त, 2014 को आवासीय मानचित्र स्वीकृत किया गया था। हालांकि, वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भवन में कथित अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था।

अवैध निर्माण को लेकर मिले थे काररवाई के निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद 10 मई, 2016 को भवन को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया गया था। बाद में भवन मालिकों ने यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई कि उन्हें सुनवाई का सही मौका नहीं मिला और निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही है। इसके बाद पांच जुलाई, 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त कर दिया गया था।

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दस्तावेजों के अनुसार, यह भवन वर्ष 1980 में लॉटरी के जरिये आवंटित किया गया था। वर्ष 2005 में इसकी सेल डीड (विक्रय विलेख) विजय कुमार और उषा के नाम हुई जबकि 2013 में इसे वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया गया। इसके बाद सात अगस्त, 2014 को एलडीए ने नए मालिकों के नाम भवन का नामांतरण कर दिया था। अब अग्निकांड के बाद प्रशासन भवन की स्वीकृतियों, निर्माण की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा मानकों के पालन और अनियमितताओं की भी जांच कर रहा है।

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