कोलकाता, 22 जून। पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक से जारी सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) में उपजे सियासी संकट के बीच सोमवार को नाटकीय घटनाक्रम हुआ, जब उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने और ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का एलान कर दिया।
यह फैसला बागी खेमे की एक अहम बैठक में लिया गया, जिसमें खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ बताने वाले नेताओं ने नई संगठनात्मक समिति के गठन के तुरंत बाद प्रस्ताव पारित कर अभिषेक बनर्जी के निलंबन की घोषणा की।
हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय नए चेयरपर्सन नियुक्त
बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नई गठित संगठनात्मक समिति का चेयरमैन नियुक्त किया है। ऋतब्रत गुट की बैठक न्यू टाउन के एक होटल में हुई, जिसमें बागी विधायकों और कोलकाता नगर निगम (KMC) समेत तीन जिलों के 70 पार्षदों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह पार्टी का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया।
बागी गुट का दावा है कि पार्टी के भीतर ‘संवैधानिक संकट’ को लेकर यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक को संबोधित करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, ‘पार्टी संविधान के मुताबिक हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन जरूरी है और आखिरी बार यह समिति फरवरी, 2022 में बनाई गई थी। पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित नहीं किया गया था, इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करना जरूरी हो गया था।’
यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह हमारी सलाहकार बन सकती हैं – ऋतब्रत बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी को लेकर कहा, ‘हमने साफ तौर पर कहा है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह हमारी सलाहकार बन सकती हैं। यदि वह नहीं चाहतीं तो कोई बात नहीं। नई तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 29 विधायकों को शामिल किया गया है.’
बागी गुट में पहुंचे विधायकों को ममता की नोटिस
इस बीच ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बागी खेमे में शामिल होने वाले अपने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी की है। पार्टी की अनुशासन समिति ने इन नेताओं पर जान बूझकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए काररवाई की है। जिन नेताओं को नोटिस जारी की गई है, उनमें फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मीन शामिल हैं।
कुणाल घोष बोले – ‘टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी, बाकी सब सर्कस’
वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के विधायक कुणाल घोष ने बागी गुट के फैसले पर कहा, ‘यह एक कॉमेडी शो है। टीएमसी से निकाले गए एक व्यक्ति ने एक विशेष सत्र बुलाया है। मामला कोर्ट में है और हमें यकीन है कि न्याय होगा। हम ऐसी हास्यास्पद हरकतों को कोई महत्व नहीं देते। टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी है। बाकी सब सर्कस है।’
अब तीन गुटों में बंटी नजर आ रही टीएमसी
ताजा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस अब तीन गुटों में बंटी नजर आ रही है। पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस है। दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का गुट, जो अब बंगाल विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में है जबकि तीसरा गुट काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले करीब दो दर्जन लोकसभा सांसदों का है, जिन्होंने नेशनल सिटिजंस पार्टी नाम के छोटे राजनीतिक दल में विलय कर संसद में एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।
बागी सांसदों व बागी विधायकों का पार्टी के नाम और सिंबल पर अलग-अलग दावा
वहीं अभिषेक बनर्जी के निलंबन के बाद अब यह सवाल और गहरा गया है कि तृणमूल कांग्रेस का असली नेतृत्व और वैचारिक धारा किसके पास है। बागी सांसदों ने संकेत दिए हैं कि वे पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। बागी विधायकों ने भी पार्टी के नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोका है।
1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड को लेकर भी स्थिति अस्पष्ट
दूसरी तरफ करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर किसका अधिकार होगा, इसको लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। हाल ही में बागी विधायकों के गुट की पुलिस कंप्लेंट के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के फंड पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया।

