जन्माष्टमी पर सीएम योगी का संदेश: श्रीकृष्ण समरसता, सत्य और लोकमंगल के प्रतीक, जीवन में उतारें उनके आदर्श

लखनऊ, 31 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्म, सामाजिक समरसता और लोकमंगल की भावना का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने लोगों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य एवं धर्म के प्रकाश का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मन को आनंदित करने वाली कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश भी निहित हैं।

उन्होंने कहा कि माखन चोरी की लीला में सहजता और निश्चलता, गोप-गोपियों के साथ आत्मीयता में प्रेम और समरसता तथा कालिय नाग के दमन में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश मिलता है। मुख्यमंत्री ने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हृदय से शुभकामनाएं दीं।

  • गोवर्धन पूजा में सामाजिक एकजुटता का संदेश

सीएम योगी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि समाज की वास्तविक शक्ति सामूहिक सहयोग और सहकारिता में निहित है। गोवर्धन पर्वत धारण कर श्रीकृष्ण ने प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि वृंदावन से लेकर बरसाना की राधारानी और नंदगांव की प्रेममयी स्मृतियों तक ब्रज की धरती आज भी श्रीकृष्ण की दिव्य चेतना को अपने कण-कण में संजोए हुए है।

  • कुलीनता नहीं, समरसता के प्रतीक हैं श्रीकृष्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कुलीनता के नहीं, बल्कि समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किए। वे द्वारकाधीश हैं, तो सुदामा के आत्मीय मित्र भी हैं।

उन्होंने कहा कि सांदीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने और सुदामा के साथ उनकी मित्रता की कथा यह संदेश देती है कि सच्चे संबंध पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनते हैं। आज के समाज में भी समरसता, समानता और आत्मीयता की आवश्यकता है।

  • अन्याय का प्रतिकार और निर्बल का संरक्षण ही लोककल्याण

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण का जीवन लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा देता है। अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण और लोकमंगल उनके जीवन-दर्शन के प्रमुख आधार रहे।

उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ प्रदेश सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, प्रतिभासंपन्न युवाओं को रोजगार, अन्नदाताओं को सहारा और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना लोककल्याण की इसी भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास है।

  • गीता का कर्मयोग हर चुनौती में मार्गदर्शक

मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का जो मार्ग दिखाया, वह किसी एक युग तक सीमित नहीं है। दैनिक जीवन की चुनौतियों में भी यह मार्ग मनुष्य का मार्गदर्शन करता है।

उन्होंने कहा कि निष्काम कर्म, सत्य के प्रति निष्ठा और लोकमंगल की भावना व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाती है। उत्तर प्रदेश की धरती श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके संदेशों की पावन भूमि है। मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव सनातन सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि इस जन्माष्टमी पर अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक समरसता और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लें। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें।

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