Sadhguru on Nepal Flood: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 80 लोग लापता, सद्गुरु ने जताई चिंता

नई दिल्ली, 27 अगस्त। तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा पर आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया उनके संगठन से जुड़ा 80 लोगों का एक समूह बाढ़ की चपेट में आने के बाद लापता है। इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल हैं।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा कर बताया कि वह खुद प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद होने और रास्ते बाधित होने के कारण वहां संपर्क करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के माध्यम से प्रभावित इलाके तक पहुंचने की अनुमति लेने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में मदद की जा सके।

80 सदस्यीय दल में कई देशों के लोग

सद्गुरु के मुताबिक, बाढ़ की चपेट में आया समूह 80 लोगों का था। इसमें 22 अमेरिकी, 12 कनाडाई, 11 ऑस्ट्रेलियाई, 9 ब्रिटिश, 4 जर्मन, 3 फ्रांसीसी, 3 नेपाली, 2 डच, 2 न्यूजीलैंड के, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन के नागरिक शामिल थे। इसके अलावा फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति भी इस दल का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि समूह में स्वयंसेवकों के अलावा एक डॉक्टर और कई नेपाली गाइड भी मौजूद थे। नेपाली गाइडों के परिवार प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं, इसलिए उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

इमिग्रेशन सेंटर पहुंचने के कुछ मिनट बाद आई आपदा

सद्गुरु ने बताया कि समूह वापसी के दौरान जब इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक स्थिति सामान्य थी। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर इमिग्रेशन सेंटर पहुंचने की जानकारी दी थी। इसके करीब नौ मिनट बाद 9:14 बजे अचानक बाढ़ और मलबे ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हो पाए, जिससे चिंता और बढ़ गई। सद्गुरु के अनुसार, समाचार रिपोर्टों में ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों और तीन स्वयंसेवकों के लापता होने की बात सामने आई है।

पानी और मलबे में बह गया शहर का हिस्सा

सद्गुरु ने कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां इमारतों और शहर के एक हिस्से तक पानी और मलबे में बह जाने की खबर है। ऐसे में फिलहाल यह पता लगाना मुश्किल है कि समूह के कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

भूकंप नहीं, ग्लेशियर से जुड़ी घटना की आशंका

आपदा के शुरुआती दौर में कुछ रिपोर्टों में बाढ़ से पहले भूकंप आने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद के वैज्ञानिक विश्लेषणों में हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने या ग्लेशियर से जुड़ी घटना की संभावना जताई गई। ऐसी घटना के बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचने से तेज फ्लैश फ्लड आई, जिसने रास्तों, पुलों, मकानों और अन्य संरचनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और जलस्तर बढ़ने के कारण राहत एवं बचाव दलों के लिए भी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ी

सद्गुरु ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है और प्रभावित परिवारों तक भी जरूरी सूचनाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।।उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना और वहां मौजूद लोगों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।

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