TMC के बागी सांसदों के ग्रुप की NCPI में विलय की घोषणा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा पत्र
नई दिल्ली, 14 जून। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को रविवार की शाम बड़ा झटका लगा, जब लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से काकोली घोष दस्तीदार की अगुआई वाले दो तिहाई से ज्यादा यानी 20 सांसदों के बागी गुट ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में खुद के विलय की घोषणा कर दी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी TMC सांसद काकोली घोष ने कहा, ‘हमने बैठने के लिए अलग इंतजाम करने का अनुरोध किया है। हमने कहा है कि हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं।
पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे – काकोली घोष
काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, ‘AITC से चुने गए हम 20 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा। ये 20 सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे।’

तृणमूल में और गहराया आंतरिक संकट
टीएमसी के बागी गुट के इस कदम से तृणमूल के अंदर का संकट और भी गहरा गया है, जिसके लोकसभा में 28 सांसद हैं। साथ ही, संसद के मॉनसून सत्र से पहले निचले सदन में विपक्ष की संख्या भी काफी कम हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि यह फैसला कानूनी पेचीदगियों के बचने के लिए लिया गया है, जो आम तौर पर एक अलग गुट बनाने पर सामने आती हैं।
कीर्ति आजाद ने लोकसभा स्पीकर को सौंपा पत्र
इससे पहले आज ही दिन में तृणमूल नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और पार्टी के नंबर दो नेता और संसदीय दल के प्रमुख अभिषेक बनर्जी का एक पत्र सौंपा। पत्र में स्पीकर से बागी गुट को स्वीकार न करने का आग्रह किया गया था क्योंकि राजनीतिक पार्टी ही सर्वोपरि होती है न कि विधायी दल।
बागी गुट को मान्यता न देने का आग्रह
पत्र में लिखा था, ‘लोकसभा में विधायी दल का अस्तित्व राजनीतिक पार्टी से ही बनता है और वह उसी का एक हिस्सा होता है। कोई भी सदस्य या सदस्यों का समूह अपनी मर्जी से उसी पार्टी का कोई समानांतर समूह या गुट नहीं बना सकता और सदन के भीतर स्वतंत्र मान्यता का दावा नहीं कर सकता।’ अदालत के एक संबंधित आदेश का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया कि कानून किसी राजनीतिक पार्टी के प्रतिस्पर्धी समूहों में बंटने को जायज नहीं मानता है। इसके बजाय, ऐसे व्यवहार को अयोग्यता के नजरिए से देखा जाता है।
