आजम खान की गिरफ्तारी पर मचा सियासी बवाल, वकील का आरोप- चुनाव के डर से हो रही कार्रवाई

लखनऊ, 1 नवंबर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की रामपुर जिला जेल से रिहाई के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आजम खान के वकील नासिर सुल्तान ने ईडी की इस कार्रवाई को गैरकानूनी और सरकार का तानाशाहीपूर्ण रवैया करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए आजम खान की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

शनिवार रात मीडिया से बातचीत में अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने कहा कि कानूनी इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का उदाहरण मुश्किल से मिलेगा, जब कोई व्यक्ति अदालत से राहत मिलने के बाद जेल से बाहर आए और उसे तत्काल दूसरी जांच एजेंसी हिरासत में ले ले। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आजम खान को जेल से बाहर आते ही हिरासत में लेने की इतनी जल्दी क्यों थी?

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में राहत मिलने के बाद आजम खान शनिवार को रामपुर जिला जेल से बाहर आए थे। हालांकि, जेल के गेट पर पहले से मौजूद ईडी की टीम ने उन्हें मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनके समर्थकों ने ईडी की कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी भी की।

‘न कारण बताया, न जगह बताई’, वकील ने उठाए कार्रवाई पर सवाल

आजम खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने हिरासत में लेने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल से बाहर निकलते ही आजम खान को अपने साथ ले जाने वाली टीम ने न तो कार्रवाई का स्पष्ट आधार बताया और न ही यह जानकारी दी कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।

वकील के मुताबिक, आजम खान की रिहाई के लिए तीन दिनों तक कानूनी लड़ाई चली और तमाम अदालती औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें राहत मिली थी। लेकिन जेल की दहलीज पार करते ही उन्हें दूसरी जांच के नाम पर हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने इसे मनमानी बताते हुए कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

‘2027 चुनाव का डर, आजम खान के बाहर रहने से नुकसान का खौफ’

अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने ईडी की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आजम खान के जेल से बाहर आने से आखिर किसे खतरा महसूस हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल को आशंका है कि आजम खान के जनता के बीच सक्रिय होने से उसे राजनीतिक नुकसान हो सकता है। नासिर सुल्तान ने आजम खान को देश के प्रमुख धर्मनिरपेक्ष नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि उनकी आवाज का प्रभाव व्यापक है। उनके मुताबिक, सरकार नहीं चाहती कि आजम खान जेल से बाहर रहकर जनता के बीच अपनी बात रखें।

जौहर यूनिवर्सिटी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई

आजम खान के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हुई है। 14 अक्टूबर 2026 को रामपुर में ईडी की शिकायत के आधार पर आजम खान, जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच एजेंसी को विश्वविद्यालय के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का संदेह है। ईडी इस मामले में धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, आजम खान को इसी जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया गया है।

रिहाई के बाद फिर कानूनी शिकंजे में आजम खान

दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रामपुर जेल से रिहाई हुई थी। लेकिन जेल से बाहर आते ही ईडी की कार्रवाई ने आजम खान की मुश्किलें फिर बढ़ा दीं। जहां अब्दुल्ला आजम अपने घर चले गए, वहीं ईडी की टीम आजम खान को अपने साथ ले गई। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आजम खान को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ सपा नेता की गिरफ्तारी पर उनके समर्थक और वकील सवाल उठा रहे हैं, वहीं ईडी की कार्रवाई जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है।

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