श्रीनगर, एक नवम्बर। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल क्रॉन्फ्रेंस (NC) सरकार के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। दरअसल, एनसी के 25 असंतुष्ट विधायकों के एक गुट ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिनों चेतावनी देते हुए सरकार में बड़े बदलाव की मांग उठा दी है। उनका कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे राजभवन का रुख कर सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं।
असंतुष्टों ने सरकार में बड़े बदलाव की मांग उठाई
बागी विधायकों की मांगों में मौजूदा सभी मंत्रियों को उनके पदों से हटाना और मुख्यमंत्री के सलाहकार को भी तत्काल हटाना शामिल है। इसके बाद पूरी तरह नई मंत्रिपरिषद बनाने की मांग की गई है। इसके लिए पूरे विधायक दल से चर्चा और पारदर्शी तरीके से मंत्रियों के चयन की बात कही गई है।
मांगें पूरी नहीं होने से सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी
सूत्रों के अनुसार असंतुष्ट विधायक चाहते हैं कि सरकार में फैसले किसी चुनिंदा समूह के जरिए एकतरफा तरीके से न लिए जाएं। उनकी मांग है कि नई कैबिनेट के गठन में पूरी विधानसभा पार्टी से सलाह ली जाए और योग्यता के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
अनुच्छेद 370 और 35A को लेकर भी दबाव
बागी गुट ने सरकार से अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को मजबूती से उठाने की मांग की है। इसमें खास तौर पर अनुच्छेद 370, 35A और अन्य संवैधानिक सुरक्षा उपायों की पूर्ण बहाली के मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाने की बात शामिल है। सूत्रों के अनुसार, यदि 14 दिनों की समय सीमा के भीतर इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बागी विधायक राजभवन मार्च कर उमर अब्दुल्ला सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर सकते हैं।
अगा सैयद रुहुल्लाह के इस्तीफे का भी दबाव
NC के सामने एक और चुनौती श्रीनगर से लोकसभा सांसद अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के तीन नवम्बर को इस्तीफा देने के एलान से जुड़ी है। उन्होंने पार्टी और लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देने की बात कही है। रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर वैचारिक प्रतिबद्धताओं को कमजोर करने और पांच अगस्त, 2019 के बाद किए गए संवैधानिक बदलावों को चुनौती देने के जनादेश से पीछे हटने का आरोप लगाया है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को बाहर से रुहुल्लाह के विरोध और भीतर से विधायकों की बगावत, दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
25 विधायकों ने समर्थन वापस लिया तो क्या होगा?
जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में NC के 41 विधायक बताए गए हैं। ऐसे में यदि 25 विधायक एकजुट होकर सरकार से समर्थन वापस लेते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो सकता है। अब NC नेतृत्व के सामने 14 दिनों के भीतर असंतुष्ट विधायकों को मनाने, सत्ता में बदलाव की मांगों पर रास्ता निकालने और सरकार को संभावित संकट से बचाने की चुनौती है।


