नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत रखना भी जरूरी है। योग की प्राचीन परंपरा में कई ऐसे आसन हैं, जो शारीरिक स्थिरता, लचीलेपन और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है बद्ध पद्मासन (Baddha Padmasana)। इसे पद्मासन का उन्नत रूप माना जाता है। इस आसन में पैरों को कमल की तरह मोड़कर पद्मासन की स्थिति बनाई जाती है और हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर पैरों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है।
हालांकि, यह आसन हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। इसके अभ्यास के लिए कूल्हों, घुटनों, कंधों और पीठ में पर्याप्त लचीलापन जरूरी है। इसलिए शुरुआत करने वालों को पहले सरल योगासन सीखने चाहिए और जरूरत पड़ने पर योग विशेषज्ञ की देखरेख में इसका अभ्यास करना चाहिए।
क्या है बद्ध पद्मासन और क्यों है खास?
बद्ध पद्मासन दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘बद्ध’ का अर्थ है बंधा हुआ और ‘पद्म’ का अर्थ कमल का फूल। इस आसन में शरीर एक स्थिर स्थिति में रहता है और हाथों को पीछे ले जाकर पैरों को पकड़ने की कोशिश की जाती है।
योगाभ्यास में इस आसन को शरीर की स्थिरता, संतुलन और एकाग्रता के लिए उपयोगी माना जाता है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह शरीर के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। ध्यान के दौरान स्थिर बैठने की क्षमता विकसित करने में भी यह सहायक हो सकता है।
बद्ध पद्मासन करने के संभावित फायदे
1. शरीर का लचीलापन बढ़ाने में मदद
इस आसन में कूल्हों, कंधों और पीठ की मांसपेशियों को विशेष स्थिति में रखना पड़ता है। उचित अभ्यास से इन हिस्सों की गतिशीलता और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
2. शरीर की स्थिरता और संतुलन में सुधार
बद्ध पद्मासन में शरीर को एक निश्चित स्थिति में बनाए रखना होता है। इससे शारीरिक नियंत्रण और स्थिर बैठने के अभ्यास को बढ़ावा मिल सकता है।
3. एकाग्रता और मानसिक शांति
योग और ध्यान के साथ इस आसन का अभ्यास करने से मन को शांत करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और अभ्यास पर निर्भर करता है।
4. बैठने की मुद्रा के प्रति जागरूकता
इस आसन में पीठ और धड़ को नियंत्रित स्थिति में रखने का अभ्यास किया जाता है। इससे शरीर की मुद्रा के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है। इसे रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का इलाज नहीं मानना चाहिए।
बद्ध पद्मासन करने का सही तरीका
इस आसन को करने से पहले पद्मासन का सुरक्षित अभ्यास सीखना जरूरी है। इसे करने के लिए इन चरणों का पालन करें:
किसी समतल और आरामदायक जगह पर योग मैट बिछाकर बैठें।
धीरे-धीरे पद्मासन की स्थिति बनाएं। दोनों पैरों को विपरीत जांघों पर तभी रखें, जब घुटनों और कूल्हों में पर्याप्त लचीलापन हो।
अब दोनों हाथों को धीरे-धीरे पीठ के पीछे ले जाएं।
अपनी क्षमता के अनुसार हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ने का प्रयास करें। शरीर पर जोर न डालें।
रीढ़ को सहज और सीधा रखें तथा सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
शुरुआत में कुछ सेकंड तक ही इस स्थिति में रहें। फिर धीरे-धीरे हाथों और पैरों को सामान्य स्थिति में लाएं।
यदि हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ना संभव न हो, तो जबरदस्ती न करें। पहले सरल विकल्पों और तैयारी वाले आसनों का अभ्यास करें।
बद्ध पद्मासन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
बद्ध पद्मासन एक उन्नत योगासन है, इसलिए इसका अभ्यास करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
घुटनों, कूल्हों, कंधों या पीठ में दर्द होने पर आसन न करें।
पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या हाथों को पीछे खींचने से बचें।
घुटनों या कूल्हों की चोट अथवा सर्जरी का इतिहास होने पर पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
गर्भावस्था या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका अभ्यास न करें।
शुरुआत में प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में अभ्यास करें।
क्या बद्ध पद्मासन से पाचन और ऊर्जा प्रवाह बेहतर होता है?
पारंपरिक योग शास्त्र में बद्ध पद्मासन को ध्यान और आंतरिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। कुछ योग परंपराएं नाड़ियों और प्राण ऊर्जा के प्रवाह की अवधारणा के आधार पर इसके आध्यात्मिक महत्व को बताती हैं। हालांकि, शरीर के चक्रों को सक्रिय करने या ऊर्जा के किसी विशेष प्रवाह को बढ़ाने के दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसी तरह, बद्ध पद्मासन से कब्ज, गैस या अपच जैसी समस्याएं दूर होने का दावा भी स्थापित चिकित्सकीय प्रमाणों से पुष्ट नहीं है। पाचन संबंधी परेशानी लगातार बनी रहने पर चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।


