नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) की 19वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन, नदी कटाव, जल निकासी की समस्याओं और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
GFCB की बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य प्रो. के. वी. राजू, बिहार के उप मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित गंगा बेसिन के राज्यों के प्रतिनिधि और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भूजल रिचार्ज के लिए ‘पुनर्भरण’ मोबाइल एप लॉन्च
बैठक के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने ‘पुनर्भरण’ मोबाइल एप लॉन्च किया। इसे भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से विकसित किया है। इस एप का उद्देश्य कृत्रिम भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करने में मदद करना है।
गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के पुनर्गठन पर चर्चा
बैठक में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC) के संशोधित कार्यक्षेत्र और पुनर्गठन पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसमें बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन की योजना मजबूत करने, बाढ़ प्रबंधन योजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन, नदी की संरचना और तलछट के अध्ययन तथा बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली (FMIS) विकसित करने जैसे मुद्दे शामिल रहे। सरकार के अनुसार, इन संस्थागत बदलावों से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होने, तकनीकी मूल्यांकन मजबूत करने और समय पर निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बाढ़ प्रबंधन के लिए जोखिम आधारित मास्टर प्लान पर जोर
बैठक में जोखिम आधारित बेसिन मास्टर प्लान तैयार करने, पुलों के नीचे जलमार्गों और वेंटवे की पर्याप्तता का आकलन करने तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
केंद्र और राज्य सरकारों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को रेखांकित किया गया। नदी की संरचना में बदलाव, तलछट जमाव, जल निकासी में बाधा, बुनियादी ढांचे के विकास और बाढ़ से निपटने की क्षमता बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया गया। बैठक में आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों, ठोस तकनीकी जांच, आवश्यक वैधानिक मंजूरियों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को समय पर दूर करने के महत्व पर जोर दिया गया।
समन्वित और तकनीक आधारित बाढ़ प्रबंधन पर सहमति
गंगा फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन के लिए जोखिम आधारित योजना, आधुनिक तकनीक, बेहतर तकनीकी मानकों और केंद्र-राज्य सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके जरिए बाढ़ प्रबंधन उपायों का समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड का गठन भारत सरकार ने 18 अप्रैल, 1972 को किया था। इसका उद्देश्य गंगा बेसिन में बाढ़, नदी कटाव और जल निकासी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित योजना बनाने और उपायों को लागू करने में सहयोग देना है।


