ITBP स्थापना दिवस : पीएम मोदी, राजनाथ सिंह ने ‘हिमवीरों’ को दी बधाई, जानें भारत-चीन सीमा पर क्या है इनकी भूमिका

नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 65वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बल के जवानों और अधिकारियों को बधाई दी। नेताओं ने देश की सीमाओं की सुरक्षा में आईटीबीपी के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान की सराहना की। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और बेहद कठिन मौसम में तैनात रहने वाले इन जवानों को ‘हिमवीर’ के नाम से जाना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में आईटीबीपी के जवानों को शुभकामनाएं देते हुए उनके अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हिमवीरों ने हर चुनौती का सामना असाधारण हिम्मत के साथ किया है। उनकी निस्वार्थ सेवा और बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है।

राजनाथ सिंह ने की हिमवीरों के साहस की सराहना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईटीबीपी के स्थापना दिवस पर जवानों और उनके परिवारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हिमवीरों ने बेहद कठिन जलवायु परिस्थितियों में भारत की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्री ने आंतरिक सुरक्षा अभियानों में भी आईटीबीपी के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जवानों का साहस, पेशेवर रवैया और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण राष्ट्रसेवा की सर्वोत्तम परंपराओं को दर्शाता है।

किरेन रिजिजू ने किया हिमवीरों के त्याग को नमन

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से आईटीबीपी के जवानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बल के आदर्श वाक्य ‘शौर्य-दृढ़ता-कर्मनिष्ठा’ का उल्लेख करते हुए कठिन परिस्थितियों में सीमा की रक्षा करने वाले जवानों के साहस और देशभक्ति को प्रेरणादायक बताया। भारतीय सेना ने भी आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस पर जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दी। सेना की ओर से थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सभी रैंक के कर्मियों की ओर से शुभकामनाएं दी गईं। वहीं, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने भी आईटीबीपी के जवानों की वीरता, निस्वार्थ बलिदान और गौरवशाली परंपरा को नमन किया।

24 अक्टूबर 1962 को हुई थी ITBP की स्थापना

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी। यह देश के प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल है और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। आईटीबीपी की तैनाती भारत-चीन सीमा के दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती है। यह बल लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बर्फीली चोटियों से लेकर आपदा राहत तक जिम्मेदारी

आईटीबीपी के जवानों को अत्यधिक ठंड, बर्फबारी, कम ऑक्सीजन और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। सीमा की निगरानी और सुरक्षा के साथ-साथ बल के जवान घुसपैठ तथा तस्करी रोकने, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भी योगदान देते हैं। इसके अलावा, आईटीबीपी के जवान विभिन्न आंतरिक सुरक्षा अभियानों में भी तैनात किए जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में लगातार देश की सुरक्षा में जुटे हिमवीरों का समर्पण और साहस उन्हें भारतीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। स्थापना दिवस के अवसर पर देश के शीर्ष नेताओं और सुरक्षा बलों की ओर से दी गई शुभकामनाएं हिमवीरों के योगदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को सम्मान देने का अवसर हैं।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular