रहें सचेत : सिर्फ पहाड़ों में नहीं, मैदानों में भी आंखों को नुकसान पहुंचा रहीं UV किरणें
नई दिल्ली, 12 जून। फोटोकेरेटाइटिस (Photokeratitis) आंख की कॉर्निया पर होने वाली UV (अल्ट्रावायलेट) किरणों से लगने वाली एक अस्थायी चोट है, जिसे सरल भाषा में आंख का ‘सनबर्न’ भी कहा जा सकता है। आमतौर पर इसे बर्फीले पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ा जाता है, लेकिन आज दिल्ली सहित मैदानी इलाकों में भी इसका खतरा बढ़ रहा है।
इन कारणों से उत्पन्न होती है समस्या
विट्रियो-रेटिना विशेषज्ञ व सलाहकार नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं मोतियाबिंद सर्जन डॉ. अभिलाषा धनखड़ के अनुसार यह समस्या तब होती है, जब आंखें लंबे समय तक यूवी किरणों के संपर्क में रहती हैं। गर्मियों में बढ़ता UV इंडेक्स, लंबे समय तक धूप में रहना, दोपहिया वाहन चलाना, आउटडोर खेलकूद और बिना सुरक्षा के वेल्डिंग जैसे कार्य इसके प्रमुख कारण हैं। कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि बादलों की उपस्थिति में भी UV किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
‘सनबर्न’ के सामान्य लक्षण
इसके लक्षण आमतौर पर UV एक्सपोजर के 6–12 घंटे बाद दिखाई देते हैं। आंखों में दर्द, जलन, लालिमा, पानी आना, रोशनी से चुभन, धुंधला दिखाई देना और आंख में रेत जैसी अनुभूति इसके सामान्य लक्षण हैं। अधिकतर मामलों में यह समस्या 24–72 घंटे में ठीक हो जाती है, लेकिन बार-बार होने वाला UV नुकसान आंखों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
99–100% UVA और UVB सुरक्षा वाले सनग्लासेस का उपयोग करें
बचाव के लिए बाहर निकलते समय 99–100% UVA और UVB सुरक्षा वाले सनग्लासेस का उपयोग करें। रैप-अराउंड या बड़े फ्रेम वाले चश्मे बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं। पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न चार बजे के बीच तेज धूप में अनावश्यक रूप से रहने से बचें। वेल्डिंग या अन्य औद्योगिक कार्यों के दौरान उचित सुरक्षात्मक आईवियर पहनना आवश्यक है।
यदि आंखों में अचानक तेज दर्द, अत्यधिक रोशनी से परेशानी या दृष्टि धुंधली होने जैसे लक्षण हों तो स्वयं उपचार करने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें। सही समय पर पहचान और उपचार से अधिकतर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
