YOGA: पेट की गैस और अपच से परेशान हैं? रोज करें पवनमुक्तासन, जानें फायदे और इसे करने का सही

लखनऊ, 16 अक्टूबर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खान-पान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने की आदत के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। गैस, अपच और पेट फूलने जैसी परेशानियों से राहत पाने के लिए लोग योग का सहारा लेते हैं। पवनमुक्तासन ऐसा ही एक सरल योगासन है, जिसे पेट की मांसपेशियों पर हल्का दबाव डालने और गैस निकालने में मददगार माना जाता है। नियमित रूप से सही तरीके से इसका अभ्यास करने से शारीरिक लचीलापन और मांसपेशियों की सक्रियता बेहतर हो सकती है।

क्या है पवनमुक्तासन?

पवनमुक्तासन संस्कृत के तीन शब्दों ‘पवन’, ‘मुक्त’ और ‘आसन’ से मिलकर बना है। पवन का अर्थ हवा, मुक्त का अर्थ छोड़ना और आसन का अर्थ योग की मुद्रा होता है। इसे अंग्रेजी में ‘विंड-रिलीविंग पोज’ (Wind-Relieving Pose) कहा जाता है। इस योगासन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को पेट की ओर लाया जाता है। इससे पेट और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। यह आसन पेट में गैस बनने या पेट फूलने की परेशानी में कुछ लोगों को राहत देने में मदद कर सकता है।

पवनमुक्तासन करने के फायदे

1. गैस और पेट फूलने में मिल सकती है राहत

पवनमुक्तासन के दौरान पेट पर हल्का दबाव पड़ता है। इससे कुछ लोगों को गैस निकलने और पेट फूलने की परेशानी में राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है।

2. पाचन संबंधी परेशानी में सहायक

योग का नियमित अभ्यास शारीरिक गतिविधि और दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। पवनमुक्तासन पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, लेकिन इसे अपच या पाचन संबंधी बीमारियों का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

3. पेट और कोर मसल्स को सक्रिय करता है

इस आसन में पेट की मांसपेशियों को सक्रिय रखना पड़ता है। इससे पेट और शरीर के मध्य भाग की मांसपेशियों की सक्रियता तथा लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

4. कमर और कूल्हों के आसपास खिंचाव

सही तकनीक से अभ्यास करने पर कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से के आसपास हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है। हालांकि, कमर दर्द या रीढ़ से जुड़ी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

5. तनाव कम करने में मदद

योग के दौरान धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से सांस लेने से शरीर को आराम मिल सकता है। पवनमुक्तासन को शांत वातावरण में करने से कुछ लोगों को तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस करने में मदद मिल सकती है।

पवनमुक्तासन करने का सही तरीका

सबसे पहले समतल जगह पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।

दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथ शरीर के बगल में रखें।

धीरे-धीरे दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं।

दोनों हाथों से घुटनों को पकड़कर पेट की तरफ हल्के से खींचें।

अपनी क्षमता के अनुसार सिर को थोड़ा ऊपर उठाया जा सकता है, लेकिन गर्दन पर जोर न डालें।

सामान्य रूप से सांस लेते हुए कुछ सेकंड इस स्थिति में रहें।

इसके बाद धीरे-धीरे पैरों को वापस सीधा कर लें और आराम करें।

शुरुआत में कम समय तक अभ्यास करें। किसी भी स्थिति में शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें। दर्द, चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत आसन रोक दें।

पवनमुक्तासन करते समय बरतें ये सावधानियां

गर्भावस्था: गर्भवती महिलाएं इस आसन को करने से बचें, जब तक उनके डॉक्टर और योग्य प्रसवपूर्व योग विशेषज्ञ इसकी अनुमति न दें।

हर्निया: हर्निया की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना इसका अभ्यास न करें।

हाल की सर्जरी या चोट: पेट, कमर, गर्दन या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर चोट अथवा हाल की सर्जरी के बाद चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

उच्च रक्तचाप: अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर पहले डॉक्टर से परामर्श लें।

दर्द होने पर: घुटनों को पेट की ओर खींचते समय अधिक दबाव न डालें। गर्दन या कमर में दर्द होने पर सिर उठाने से बचें।

क्या पवनमुक्तासन रोज करना चाहिए?

स्वस्थ व्यक्ति अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार इस आसन का नियमित अभ्यास कर सकता है। शुरुआत में कुछ सेकंड से शुरू करके धीरे-धीरे समय बढ़ाना बेहतर है। इसके साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर भोजन करने की आदत भी जरूरी है।

ध्यान रखें कि पेट में लगातार गैस, तेज दर्द, उल्टी, मल में खून या अचानक वजन घटने जैसी समस्या हो तो केवल योग पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से सलाह लें। पवनमुक्तासन सहायक अभ्यास हो सकता है, लेकिन यह किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं है।

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