राम मंदिर दान प्रकरण : आरोपियों की 20 से अधिक जमीनों के रिकॉर्ड पुलिस के हाथ लगे, बैंक खातों की भी हो रही जांच
अयोध्या, 4 जुलाई। राम मंदिर दान प्रकरण की जांच अब कथित तौर पर अपराध से अर्जित संपत्तियों तक पहुंच गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने आरोपियों और उनके परिवार से जुड़ी 20 से अधिक जमीनों के रिकॉर्ड हासिल किए हैं। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, राजस्व विभाग से आरोपियों और उनके परिजनों के भूमि रिकॉर्ड मांगे गए थे। अब तक करीब 20 भूमि पार्सलों से संबंधित दस्तावेज पुलिस को मिल चुके हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां कब खरीदी गईं और आरोपियों का राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव किस समय हुआ।
संपत्तियों के खरीद समय और आय के स्रोत की होगी पड़ताल
जांच एजेंसियां दोनों समय-सीमाओं का मिलान कर रही हैं। यदि यह सामने आता है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद आरोपियों ने संपत्तियां खरीदीं और उनके लिए इस्तेमाल धन का स्रोत संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित संपत्तियों को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध से अर्जित संपत्ति) मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले शुक्रवार को अयोध्या पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर एक वाहन को कथित रूप से अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए जब्त किया था।
नकदी गिनती केंद्र की तस्वीर बनी अहम सबूत
जांच के दौरान एजेंसियों को पहली बार ऐसी तस्वीर भी मिली है, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के अंदर दिखाई दे रहे हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह तस्वीर महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है, क्योंकि इसमें दोनों आरोपी उस कक्ष में मौजूद दिख रहे हैं, जहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की नकदी की गिनती और आगे की प्रक्रिया की जाती थी।
अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार
राम मंदिर दान प्रकरण में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। फिलहाल पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले के वित्तीय पहलुओं, बैंक लेनदेन, संपत्ति खरीद और कथित धन के स्रोत की जांच में जुटी हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
