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जापान ओपन : पीवी सिंधु पहली बार फाइनल में, चोट के कारण चेन यूफेई ने दूसरे गेम के बीच कोर्ट छोड़ा

जापान ओपन : पीवी सिंधु पहली बार फाइनल में, चोट के कारण चेन यूफेई ने दूसरे गेम के बीच कोर्ट छोड़ा

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टोक्यो, 18 जुलाई। पूर्व विश्व चैम्पियन पीवी सिंधु ने शनिवार को यहां जापान ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार जगह बना ली, जब टोक्यो ओलंपिक चैम्पियन चीनी स्टार चेन युफेई ने मैच के बीच में ही कोर्ट छोड़ दिया। उल्लेखनीय यह भी है कि सिंधु इस टूर्नामेंट के फाइनल का टिकट पाने वालीं पहली भारतीय शटलर हैं।

विश्व रैंकिंग में 10वें नंबर पर काबिज 31 वर्षीय सिंधु ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन जिम्नेजियम के कोर्ट नंबर एक पर 66 मिनट की कश्मकश में 21-19, 15-10 की अग्रता ले रखी थी, तभी चौथी सीड चेन ने मांसपेशियों में खिंचाव के कारण कोर्ट छोड़ने का फैसला किया।

भारतीय शटलर डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय बाद फाइनल में

देखा जाए तो डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय बाद सिंधु बीडब्ल्यूएफ टूर के किसी टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंची हैं। उन्होंने अंतिम बार दिसम्बर, 2024 में लखनऊ में सैयद मोदी इंडिया इंटरनेशनल सुपर 300 टूर्नामेंट जीता था। वह उसी वर्ष की शुरुआत में मलेशिया ओपन सुपर 500 में रनर-अप भी रही थीं। उनका आखिरी बड़ा खिताब 2022 में सिंगापुर ओपन सुपर 500 में आया था।

चेन यूफेई के खिलाफ 7 वर्षों में मिली पहली जीत

गौर करने वाली बात यह है कि चेन के खिलाफ सिंधु ने सात वर्षों में पहली जीत हासिल की। उनकी अंतिम जीत अगस्त, 2019 BWF विश्व चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में हुई थी, जहां उन्होंने अपना पहला विश्व खिताब जीता था। चेन ने सिंधु से पिछली पांच मुलाकातों में जीत हासिल की थी, जिनमें इसी वर्ष इंडोनेशियाई मास्टर्स भी शामिल है। खैर, इस जीत के साथ चेन के खिलाफ सिंधु का मैच रिकॉर्ड 7-8 हो गया है।

तीसरी सीड जापानी अकाने यामागुची से होगी खिताबी टक्कर

दो बार की ओलम्पिक पद विजेता सिंधु का अब फाइनल में रविवार को तीसरी सीड जापानी अकाने यामागुची से मुकाबला होगा, जिन्होंने 65 मिनट तक खिंचे संघर्ष में छठी सीड इंडोनेशियाई पुत्री कुसुमा वर्दानी के खिलाफ एक गेम से पिछड़ने के बाद 9-21, 21-16, 21-14 से जीत हासिल की।

मेरे लिए हर मैच पहले मैच की तरह : सिंधु

फाइनल में प्रवेश के बाद सिंधु ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि फाइनल में पहुंच सकी। मेरे लिए हर मैच पहले मैच की तरह है, खासकर आज का मैच। शुरू से ही फोकस बनाये रखना जरूरी था क्योंकि शीर्ष रैकिंग के खिलाड़ियों के खिलाफ हर अंक मायने रखता है।’

पूर्व विश्व नंबर एक सिंधु ने कहा, ‘मैंने अपना फोकस बनाये रखा था और मेरे कोच भी बार बार यही कह रहे थे। पहले गेम में मैंने बढत बना ली थी, लेकिन वह काफी करीब आ गई,  जिसके बाद फोकस बनाये रखना जरूरी था। कई बार आगे चलने के बाद अंक गंवाने से निराशा आ जाती है। दिमाग में काफी कुछ चल रहा होता है।’

दोनों गेमों में रोमांचक संघर्ष देखने को मिला

देखा जाए तो क्वार्टर फाइनल में पूर्व विश्व चैम्पियन जापानी नोजोमी ओकुहारा से सवॉकओवर मिलने के बाद अच्छी तरह आराम करके सेमीफाइनल में उतरीं सिंधु का खेल तेज, ऊर्जावान और रणनीति के हिसाब से सटीक था। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाया, रैलियों पर अपना दबदबा बनाए रखा और समझदारी भरे शॉट सेलेक्शन व सहज बदलावों के जरिए यूफेई के मजबूत डिफेंस को कुशलता से तोड़ा।

हालांकि चीनी शटलर ने मजबूत शुरुआत की और शुरुआती बढ़त बनाई, लेकिन सिंधु ने चार अंक हासिल करके 10-5 की बढ़त बना ली। उन्होंने मिड-गेम इंटरवल तक अपनी लय बनाए रखी, जहां उनके कोच ने उन्हें आक्रामक बने रहने के लिए कहा।

खेल फिर से शुरू होने के बाद मुकाबला और कड़ा हो गया, जिसमें दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी और कड़ी रैलियां हुईं। सिंधु के क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप शॉट विशेष रूप से असरदार साबित हुए, जिससे यूफेई को कोर्ट पर ज्यादा दौड़ना पड़ा और सिंधु को अपनी बढ़त बढ़ाने में मदद मिली। हालांकि, यूफेई ने अपनी जाना-पहचाना जुझारूपन दिखाया और वापसी करते हुए अंतर को घटाकर एक अंक कर दिया।

पहले गेम में 51 शॉट की मैराथन रैली

51-शॉट की एक मैराथन रैली ने मैच के स्तर को दिखाया, जिसमें अंततः सिंधु ने अंक जीता। 19-19 के स्कोर पर तनाव चरम पर था, लेकिन सिंधु ने अहम मौके पर अपनी तीव्रता बढ़ाई, बढ़त लेने के बाद उन्होंने हुंकार भरी और पहला गेम अपने नाम किया।

दूसरा गेम भी कुछ ऐसा ही रहा, जिसमें सिंधु ने शुरुआती बढ़त बनाई और मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। ब्रेक के समय वह 11-7 से आगे थीं और अपना दबदबा बनाए रखा, जबकि यूफेई को शारीरिक रूप से संघर्ष करना पड़ रहा था। जैसे-जैसे हैमस्ट्रिंग की समस्या बढ़ी, चीनी खिलाड़ी को अंततः हटना पड़ा, जिससे सिंधु को एक शानदार जीत मिली।

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