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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सुभाषितम’ संदेश में कहा- ‘आत्मा स्वभाव से शुद्ध और स्वयंप्रभः’

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सुभाषितम’ संदेश में कहा- ‘आत्मा स्वभाव से शुद्ध और स्वयंप्रभः’

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नई दिल्ली, 26 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘सुभाषितम’ शीर्षक से एक संदेश साझा किया, जिसमें कहा गया है कि सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें।” संदेश के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया है।

श्लोक में कहा गया है कि आत्मा स्वभाव से सदा शुद्ध, नित्य, सुखस्वरुप और स्वयं प्रकाशमान है। श्लोक इस प्रकार है: ‘आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः। अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्‌।।’इस श्लोक का मतलब है, “आत्मा स्वभाव से सदा शुद्ध, नित्य, सुखस्वरूप और स्वयं प्रकाशमान है; किन्तु अज्ञान के कारण वह मलिन प्रतीत होती है, और ज्ञान से वही पुनः अपने शुद्ध स्वरूप में प्रकट हो जाती है।”

इससे पहले, सोमवार को अपने ‘सुभाषितम’ संदेश में पीएम मोदी ने कहा, “प्रकृति की असीम कृपा, सूर्यदेव की ऊर्जा और वर्षा का पावन आशीर्वाद हम सभी के जीवन को सुख-सौभाग्य से समृद्ध करता है। मेरी कामना है कि धरती पर सदैव हरियाली और खुशहाली बनी रहे। शं नो देवः सविता त्रायमाणः शं नो भवन्तूषसो विभातीः। शं नः पर्जन्यो भवतु प्रजाभ्यः शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः॥”इस श्लोक का अर्थ है, “संसार की रक्षा करने वाले प्रकाशस्वरूप सविता देव हमारे लिए मंगलकारी हों। प्रकाशमान उषाएँ हमारे जीवन में सुख और मंगल लाएँ। वर्षा के देव पर्जन्य हमारी प्रजा का कल्याण करें और खेती, अन्न तथा भूमि के स्वामी कल्याणदाता हमें सुख-समृद्धि प्रदान करें।”

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