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राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-उत्तर मैसेडोनिया व्यापार मंच को किया संबोधित, निवेश व प्रौद्योगिकी साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-उत्तर मैसेडोनिया व्यापार मंच को किया संबोधित, निवेश व प्रौद्योगिकी साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर

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स्कोपिए, 21 जुलाई। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को स्कोपिए में आयोजित भारत-उत्तर मैसेडोनिया व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने व्यापार के साथ निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और दीर्घकालिक कारोबारी सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए उद्योग जगत से नए अवसरों की पहचान करने का आह्वान किया।

पहली राष्ट्रपति स्तरीय द्विपक्षीय यात्रा का उल्लेख

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उत्तर मैसेडोनिया में किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा व्यापारिक स्तर अभी भी उपलब्ध संभावनाओं की तुलना में काफी कम है।

निवेश बढ़ाने पर दिया जोर

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापारिक संबंधों को वास्तविक आर्थिक साझेदारी में बदलने के लिए दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), फार्मास्युटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, कृषि-प्रसंस्करण और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन जैसे क्षेत्रों को निवेश और सहयोग के लिए प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने उत्तर मैसेडोनिया को अगले वर्ष भारत में आयोजित होने वाले वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES) में भाग लेने का भी आमंत्रण दिया।

स्टार्ट-अप और टेक्नोलॉजी सहयोग पर जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के स्टार्ट-अप, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और प्रौद्योगिकी कंपनियां साझेदारी के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे सकती हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

उद्योग जगत से दीर्घकालिक साझेदारी का आह्वान

राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के उद्योग संगठनों को लाभकारी परियोजनाओं की पहचान कर दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध विकसित करने चाहिए। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों, निवेश एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों से संपर्क बढ़ाने तथा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

असेंबली को संबोधन में संसदीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर दिया जोर

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने उत्तर मैसेडोनिया की असेंबली को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग, लोकतांत्रिक मूल्यों और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत उत्तर मैसेडोनिया को एक दूरस्थ देश नहीं, बल्कि स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।

लोकतंत्र दोनों देशों को जोड़ने वाला साझा विश्वास

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया को जोड़ने वाला साझा विश्वास है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की संसदें जनता की स्वतंत्रता की रक्षक, कानून निर्माण की संस्थाएं और राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने संसदीय कूटनीति के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सांसदों के बीच नियमित संवाद से ऐसा संस्थागत विश्वास विकसित होता है, जो राजनीतिक परिवर्तन के बाद भी कायम रहता है।

युवा सांसदों से संवाद बढ़ाने की अपील

राष्ट्रपति ने युवा सांसदों से नई दिल्ली और स्कोपिए के बीच नियमित आदान-प्रदान बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे संसदीय कार्यप्रणाली और लोक नीति निर्माण की सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को साझा करने का अवसर मिलेगा और दोनों लोकतंत्रों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।

दक्षिण-पूर्वी यूरोप को भारत ने बताया उभरता क्षेत्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विश्व की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का केंद्र बदल रहा है और भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को विकास तथा नवाचार के उभरते क्षेत्र के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि उत्तर मैसेडोनिया भूमध्यसागर, मध्य यूरोप और पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। भारत व्यापार और निवेश के नए अवसरों के माध्यम से न केवल उत्तर मैसेडोनिया बल्कि पूरे क्षेत्र के साथ अपने सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश को किया रेखांकित

राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी देश अकेले प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने भारत की प्राचीन जीवन-दृष्टि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जब दुनिया संघर्ष और आर्थिक विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब यह सिद्धांत दीवारें खड़ी करने के बजाय सहयोग और विश्वास के पुल बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास और उज्ज्वल भविष्य की सोच रखने वाले दोनों लोकतांत्रिक देशों को मिलकर शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

कई भारतीय प्रतिनिधि भी रहे मौजूद

राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति डॉ. गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा भी मौजूद रहीं। इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और लोकसभा सांसद विजय बघेल भी उपस्थित थे।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन पर फोकस

राष्ट्रपति मुर्मु ने कम्पनियों से केवल तात्कालिक व्यापारिक सौदों तक सीमित न रहने, बल्कि प्रौद्योगिकी अंतरण, संयुक्त उद्यम, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारियों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह व्यापार मंच भारत और उत्तर मैसेडोनिया के बीच आर्थिक सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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