Homeहिन्दीराष्ट्रीयPM Modi Subhashit: प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक, बताया सूर्य...

PM Modi Subhashit: प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक, बताया सूर्य और प्रकाश के अटूट संबंध का संदेश

नई दिल्ली, 14 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रेरक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने सूर्य और उसके प्रकाश के परस्पर अटूट संबंध को उदाहरण बनाकर एक-दूसरे पर निर्भरता और एकता का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने लिखा, “प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते। प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥”

इस श्लोक का हिंदी भावार्थ है कि जिस प्रकार सूर्य अपने प्रकाश के बिना दिखाई नहीं देता और प्रकाश का अस्तित्व भी सूर्य के बिना संभव नहीं है, उसी प्रकार दोनों की शक्ति और अस्तित्व एक-दूसरे पर पूर्ण रूप से आश्रित हैं। यह श्लोक परस्पर सहयोग, समन्वय और एकता के महत्व को रेखांकित करता है।

इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य सुभाषित साझा करते हुए कहा था कि जब समग्र विकास के साथ प्रत्येक देशवासी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित होता है, तभी राष्ट्र की प्रगति को नई गति मिलती है। उन्होंने लिखा था कि इसी प्रेरक भावना के साथ भारत के सामर्थ्य को निरंतर सशक्त बनाने का प्रयास जारी है। सोमवार को ही प्रधानमंत्री ने एक और संस्कृत श्लोक भी साझा किया था…

“कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्। राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥”

इसका हिंदी अर्थ है कि कन्याओं के हितों की समुचित व्यवस्था करना, नई पीढ़ी के संरक्षण एवं विकास को सुनिश्चित करना तथा राष्ट्र की एकता, सुरक्षा, समृद्धि और सुव्यवस्थित संचालन के लिए निरंतर आवश्यक प्रबंधन करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का नित्य कर्तव्य है। वहीं, 9 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए संस्कृत का एक और सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं तथा देश के युवा इन्हीं मूल्यों के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।उस दौरान साझा किए गए श्लोक…

“अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥”

का भावार्थ है कि उन्नति का मूल आधार उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ है। जो व्यक्ति निराश हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करता है, वही अंततः सफलता प्राप्त करता है। इसलिए मनुष्य को सदैव सकारात्मक सोच और अटूट विश्वास के साथ कर्म करते रहना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments