पीएम मोदी ‘भजन क्लबिंग’ में हुए शामिल, भक्ति संगीत की धुनों पर युवाओं का दिया साथ

नई दिल्ली, 25 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘भजन क्लबिंग’ में हिस्सा लिया। यह एक नया ट्रेंड है, जिसमें युवा कॉन्सर्ट जैसे माहौल में इकट्ठा होकर हिन्दू भक्ति गीत गाते हैं, तालियां बजाते हैं और नाचते हैं।

भजन पर तालियां बजाते और डफली जैसा वाद्ययंत्र बजाते दिखे पीएम मोदी

इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) परिवार के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर राष्ट्रीय राजधानी स्थित भाजपा मुख्यालय के सामने बने एक पार्क में हुआ। सबसे आगे की लाइन में बैठे पीएम मोदी भगवान राम को समर्पित एक भजन पर तालियां बजाते और डफली जैसा वाद्ययंत्र बजाते हुए दिखे। वहां मौजूद अधिकतर लोग और गायक युवा थे, जो धुनों पर तालियां बजाते हुए दिख रहे थे।

‘भजन क्लबिंग’ भारत के कई शहरों और विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही

दरअसल, भजन क्लबिंग’ एक नया सांस्कृतिक ट्रेंड है, जिसमें युवा पारंपरिक भक्ति गीतों की प्रस्तुति के लिए जोश भरे, कॉन्सर्ट जैसे माहौल में इकट्ठा होते हैं। इसमें शामिल होने वाले लोग, जिनमें ‘जेन जी’ के कई युवा भी होते हैं, पारंपरिक आध्यात्मिक गीतों को आधुनिक, जोश भरे अकूस्टिक या इलेक्ट्रॉनिक रिदम के साथ गाते हैं, तालियां बजाते हैं और नाचते हैं। बिना शराब वाले क्लब जैसे माहौल में होने वाली ‘भजन क्लबिंग’ भारत के कई शहरों और विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

पीएम मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

इससे पहले दिन में पीएम मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अंत्योदय दर्शन को जन कल्याण और राष्ट्रीय विकास का आधार बताया। उन्होंने एक पोस्ट में इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पंडित दीनदयाल का दृष्टिकोण आज भी समकालीन नीतियों और जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण को दिशा देता है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘राष्ट्र सेवा के सच्चे अनुयायी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर मेरी श्रद्धांजलि। उन्होंने समाज के सबसे निचले तबके के व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और हमें अंत्योदय का दर्शन दिया, जो आज भी जन कल्याण के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।’

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से इस विचारक की विरासत को अपनाने का आग्रह करते हुए आगे कहा, ‘आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने और अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के अपने संकल्प को दोहराएं। प्रयास करने से ही फल मिलता है।’

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