NSE की शेयर बाजार में एंट्री फीकी : ₹1,785 के IPO के मुकाबले ₹1,800 पर लिस्ट; निवेशकों को मिला मामूली फायदा

मुंबई, 24 सितंबर। लंबे इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने गुरुवार को शेयर बाजार में दस्तक दे दी। हालांकि, NSE की लिस्टिंग निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक जोरदार नहीं रही। NSE का शेयर बीएसई पर 1,800 रुपये प्रति शेयर के भाव पर सूचीबद्ध हुआ, जबकि इसका इश्यू प्राइस 1,785 रुपये था। इस तरह शेयर की लिस्टिंग इश्यू प्राइस से महज 0.84 प्रतिशत ऊपर हुई।

NSE का आईपीओ 17 से 21 सितंबर तक खुला था और इसे कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इश्यू का आकार 22,568.94 करोड़ रुपये था, जबकि निवेशकों की ओर से करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गई थीं।

1,700-1,785 रुपये था प्राइस बैंड

NSE आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश किए। करीब 22,569 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू था।

GMP में आई थी तेज गिरावट

लिस्टिंग से पहले NSE आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में भी तेज गिरावट देखने को मिली थी। बुधवार को GMP कथित तौर पर घटकर करीब 43 रुपये प्रति शेयर रह गया था। आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में NSE को लेकर सेंटीमेंट मजबूत था और प्रीमियम करीब 200 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया था। उस समय इससे इश्यू प्राइस के मुकाबले 8 प्रतिशत से अधिक संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिल रहा था।

QIB ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) हिस्से को सबसे ज्यादा मांग मिली। QIB का हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.55 गुना और रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (RII) का हिस्सा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ।

ट्रांजैक्शन चार्ज पर NSE की बड़ी निर्भरता

NSE की आय में ट्रांजैक्शन चार्ज की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2026 में परिचालन से होने वाले राजस्व में ट्रांजैक्शन चार्ज की हिस्सेदारी 78.65 प्रतिशत रही। इसमें अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान परिचालन राजस्व में 60 प्रतिशत से अधिक था। यह एक्सचेंज के डेरिवेटिव्स कारोबार पर निर्भरता को दर्शाता है।

कई सेगमेंट में मजबूत बाजार हिस्सेदारी

वित्त वर्ष 2026 में इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की बाजार हिस्सेदारी करीब 93 प्रतिशत, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79 प्रतिशत, प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर इक्विटी ऑप्शंस में 74.71 प्रतिशत और करेंसी फ्यूचर्स में 99.48 प्रतिशत रही। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इक्विटी ऑप्शंस बाजार में NSE की हिस्सेदारी घटकर 68.48 प्रतिशत रह गई।

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