भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: भारतीय निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच, किसानों और MSME को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मंगलवार से लागू हो गया है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। समझौते के तहत भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी, जबकि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है। सरकार का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा।

पीयूष गोयल बोले- एमएसएमई, किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से एमएसएमई, किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह समझौता भारतीय पेशेवरों के लिए भी नए रास्ते खोलेगा, जबकि देश के मूलभूत हित सुरक्षित रहेंगे। गोयल के मुताबिक, भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और किसानों की आय को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

डेयरी क्षेत्र को रखा गया संरक्षण के दायरे में

वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने डेयरी समेत संवेदनशील क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखा है। समझौते में किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर बढ़ने के साथ घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा भी की जा सके। गोयल ने विजयादशमी के अवसर पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए लागू होने को आर्थिक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया।

न्यूजीलैंड जाएगा भारत में बना जेसीबी, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा

पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन की न्यूजीलैंड को होने वाली पहली खेप को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में ‘मेड इन इंडिया’ जेसीबी मशीनों का उपयोग भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। सरकार को उम्मीद है कि मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और घरेलू कंपनियों को विदेशी बाजारों में विस्तार करने का अवसर मिलेगा।

व्यापार समझौते से निवेश और कारोबार को मिलेगी गति

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते केवल आयात शुल्क घटाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण को बढ़ावा देने वाली दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी का आधार बनते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे समझौतों से नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया आसान बनाने और दोनों देशों के बीच कारोबार सुगमता बढ़ाने में मदद मिलती है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आईटी, फार्मा और सेवा क्षेत्र को भी मिलेंगे अवसर

इस समझौते से भारतीय सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), पेशेवर सेवाओं, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा, भारतीय फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों के लिए भी बाजार तक पहुंच आसान होने की संभावना है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों की निरीक्षण मंजूरियों को स्वीकार करेगा।

इससे नियामकीय अनुपालन की प्रक्रिया कम जटिल हो सकती है और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय घट सकता है। कुल मिलाकर, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को भारतीय निर्यात, विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ निर्यातकों की तैयारी, बाजार की मांग और समझौते की शर्तों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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