कोलकाता, 16 जून। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने बीते विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट पर अपनी पराजय को कलकत्ता हाई कोर्ट में मंगलवार को चुनौती दी। भाजपा उम्मीदवार व मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को इस सीट पर 15,105 वोट से हराया था।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों से जीती थी भवानीपुर सीट
प्राप्त जानकारी के अनुसार ममता ने अपने घरेलू मैदान पर हार मानने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्होंने चुनाव नतीजों के 42 दिन बाद अपनी पराजय को चुनौती देने के लिए कोर्ट का रुख किया।
टीएमसी सूत्रों ने कहा कि पूर्व सीएम बनर्जी परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका की पुष्टि करने के लिए अपराह्न हाई कोर्ट की रजिस्ट्री गईं। उनके साथ तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन, वकील और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी व पार्टी नेता कुणाल घोष भी मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव की मतगणना चार मई को हुई थी। चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य में पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने। भवानीपुर में तृणमूल नेता को 58,812 वोट मिले, जो 42.19 प्रतिशत वोट शेयर था। वहीं शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जो कुल वोटों का 53.02 प्रतिशत था।
तृणमूल सुप्रीमो ने शुरू से ही चुनावी नतीजों पर शक जताया था। उन्होंने भाजपा की इस जीत को ‘गलत’ बताया। वोटों की गिनती के दिन, भवानीपुर सीट के लिए गिनती की प्रक्रिया बार-बार रुका। देरी का कारण जानने के लिए ममता दोपहर में खुद सखावत मेमोरियल स्कूल गईं। करीब दो घंटे बाद बाहर निकलते हुए उन्होंने मारपीट का आरोप लगाया।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ममता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, ‘प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने पुलिस प्रशासन, चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करके यह चुनाव जीता, उन्होंने वोट लूटे।’ उन्होंने शिकायत की कि (अब पूर्व) राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी, मनोज अग्रवाल के पास शिकायत दर्ज कराने का कोई नतीजा नहीं निकला। ममता ने 4 मई को भविष्यवाणी की थी, ‘हम वापस आएंगे।’
दिलचस्प यह रहा कि ममता बनर्जी तृणमूल की चुनावी हार के बाद 14 मई को पहली बार कलकत्ता हाई कोर्ट गईं। उन्होंने वकील का काला कोट पहना हुआ था। वह राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर बहस करने के लिए कोर्ट पहुंचीं थीं। कोर्ट गाउन पहनकर और एक वकील के तौर पर पेश होकर, उन्होंने चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच के सामने दलीलें पेश की थीं।

