CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर NDA में भी उठी आवाज : 3 सहयोगियों ने निर्वाचन आयोग से मांगी सफाई

नई दिल्ली, 25 सितम्बर। मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर कथित मतभेद से जुड़े खुलासे के बाद विपक्ष जहां मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार व भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ हमलावर है वहीं अब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भी आवाजें उठने लगी हैं।

चिराग, उपेंद्र कुशवाहा और TDP ने EC से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट जवाब मांगा

इस क्रम में एनडीए के तीन सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने EC से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

जनता के मन में पैदा हुए सवालों को चुनाव आयोग दूर करे

लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) चिराग पासवान ने साफ किया कि वह न तो चुनाव आयोग की ओर से बोल रहे हैं और न ही विपक्ष के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं। उनका सिर्फ यह कहना है कि मौजूदा विवाद के बाद जनता के मन में पैदा हुए सवालों को चुनाव आयोग को दूर करना चाहिए। वहीं RLM के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की जबकि लोकसभा में TDP संसदीय दल के नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि पारदर्शिता से संवैधानिक संस्थाओं में भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।

एनडीए के सहयोगियों की ये टिप्पणियां अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद सामने आईं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तद्वय सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 माह में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।

सीईसी के इस्तीफे की मांग के साथ उनके खिलाफ महाभियोग भी लाने पर विचार कर रहा विपक्ष

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों में वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म 6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल से जुड़े मुद्दे शामिल थे। इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के एसआईआर को रोकने की मांग की है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग भी लाने की बात की है।

एनडीए के सहयोगी दलों की बात करें तो सबसे पहले केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने आवाज उठाई। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं यह स्पष्ट कर दूं कि सरकार के हिस्से के रूप में मेरा इरादा एक संवैधानिक संस्था का बचाव करने का नहीं है। मैं विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में भी ज्यादा चिंतित नहीं हूं, जो हमेशा वही रुख अपनाएगा, जो राजनीतिक रूप से उसके अनुकूल हो।’

चिराग बोले – लोगों के मन में उपजी गलतफहमी दूर करे चुनाव आयोग

उन्होंने कहा, ‘लेकिन यदि लोगों का चुनावी प्रणाली पर से भरोसा उठना शुरू हो गया तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा और इसलिए, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को और अधिक मजबूती से अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। राहुल गांधी और उनके सहयोगी जो कह रहे हैं, उस पर उसे प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। लेकिन चुनाव आयोग को लोगों के मन में गलतफहमी दूर करनी चाहिए।

स्पष्टीकरण जारी करे चुनाव आयोग – उपेंद्र कुशवाहा

वहीं बिहार से ही ताल्लुक रखने वाले एनडीए के दूसरे सहयोगी नेता राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि इस विवाद से लोगों में भ्रम पैदा हुआ है। चुनाव आयोग को X पर टैग करते हुए उन्होंने लिखा, ‘SIR को लेकर हुए विवाद ने जनता के बीच काफी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इस मामले पर ध्यान देने की ज़रूरत है। चुनाव आयोग को इस भ्रम को दूर करने के लिए तुरंत असल स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।’

TDP ने कहा – चुनाव आयोग से पारदर्शिता मिलना फायदेमंद होगा

वहीं लोकसभा में TDP संसदीय दल के नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR का काम पारदर्शी तरीके से किया गया, फिर भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मिलना फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, ‘आंध्र प्रदेश के नजरिए से और SIR प्रक्रिया को करीब से देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। हर वोटर को इसमें शामिल होने और अपनी चिंताएं जाहिर करने के लिए पर्याप्त मौके और समय दिया गया।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह प्रक्रिया सफल रही है। यहां तक कि विपक्ष भी आंध्र प्रदेश में इस प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं को सही साबित नहीं कर पाया है। साथ ही, भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिस पर हमारे लोकतंत्र में एक अहम ज़िम्मेदारी है। इसलिए जब भी कोई सवाल उठाए, तो सही स्पष्टीकरण देना और पारदर्शिता बनाए रखने से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा मज़बूत करेगा।’

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