नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। सीजेपी के खुले न्योते के बाद कई विपक्षी दलों ने प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है, जबकि कांग्रेस ने इससे दूरी बनाए रखी है।
AAP और TMC समेत ये दल होंगे शामिल
सीजेपी के प्रदर्शन में कई प्रमुख विपक्षी दलों के शामिल होने की बात सामने आई है। वामपंथी दलों की ओर से सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई-एमएल, आरएसपी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक सहित प्रमुख लेफ्ट पार्टियां और उनके छात्र संगठन प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी की मौजूदगी से प्रदर्शन को विपक्षी समर्थन मिलने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी सीजेपी के इस आंदोलन में शामिल होगी। इस तरह SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर अलग-अलग विपक्षी दलों की एकजुटता प्रदर्शन के दौरान दिखाई दे सकती है।
कांग्रेस ने बनाई दूरी
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रही कांग्रेस ने इस प्रदर्शन से दूरी बना ली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान में शामिल होंगे। इस वजह से कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा जंतर-मंतर के इस प्रदर्शन में नजर नहीं आएगा। हालांकि, चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर कांग्रेस पहले से ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।
अखिलेश यादव ने दिया नैतिक समर्थन
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदर्शन में सीधे शामिल होने के बजाय आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया है। उन्होंने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी देश की युवा ऊर्जा के साथ खड़ी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह ताकत के बल पर जनता को रोकने की कोशिश करेगी तो यह उसकी बड़ी भूल होगी। सपा प्रमुख ने जंतर-मंतर को नई चेतना और जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यदि सरकार आंदोलनकारियों को रोकती है तो देश के अलग-अलग हिस्सों में जंतर-मंतर जैसे आंदोलन खड़े हो सकते हैं।


