मुंबई, 10 अक्टूबर। दिल्ली में शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की सख्ती पर सवाल उठाए हैं। मुंबई से दिल्ली रवाना होते हुए दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर युवाओं और नागरिकों से डरने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया।
‘दिल्ली को छावनी में क्यों बदला गया?’
अभिजीत दिपके ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन को लेकर लगाए गए कथित प्रतिबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को अपने ही नागरिकों से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं पर रोक, सड़कों पर पाबंदी और इंटरनेट बंद करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेना और सीआरपीएफ की तैनाती की गई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार अपने ही देश के नागरिकों के साथ संघर्ष की स्थिति पैदा करना चाहती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि उनके बचाव में इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था क्यों की जा रही है।
‘विरोध करना हमारा मौलिक अधिकार’
सीजेपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों पर दबाव बना रही है। उन्होंने दावा किया कि लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए तरह-तरह की चेतावनियां दी जा रही हैं और पुलिस लोगों को डराने का प्रयास कर रही है। दिपके ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएगा।
‘गिरफ्तारी से डर नहीं’
दिल्ली पहुंचने पर संभावित हिरासत या गिरफ्तारी के सवाल पर अभिजीत दिपके ने कहा कि वह किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना चाहती है तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि चाहे उन पर UAPA या NSA जैसी कड़ी धाराएं क्यों न लगाई जाएं, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा लोकतंत्र के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी।


