लखनऊ, 18 जुलाई। अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बाद अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मुख्यमंत्री के दावे पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
बृजभूषण बोले- हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई
गोंडा के नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह बचपन से हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के लिए जाते रहे हैं और वहां कभी नमाज पढ़े जाने की घटना नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम व्यक्ति का योगदान रहा था, जिसका उल्लेख वहां लगे शिलालेख में दर्ज है।
अखिलेश यादव ने बताया ‘मिथ्या प्रचार’
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में मुख्यमंत्री के दावे को मिथ्या प्रचार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले से ध्यान हटाने के लिए हनुमानगढ़ी का मुद्दा उठा रही है। अखिलेश ने कहा कि जो लोग हनुमानगढ़ी को लेकर गलत प्रचार कर रहे हैं, उन्हें अपने कथित “महापाप” का प्रायश्चित करना चाहिए और हनुमानगढ़ी से क्षमा मांगनी चाहिए।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता में हैं, वहां भ्रष्टाचार, गबन और लूट के मामले सामने आ रहे हैं। उनका दावा था कि अभी केवल पहली परत खुली है और आगे और भी खुलासे होंगे।
क्या कहा था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि जो दल आज आस्था की बात करते हैं, उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कराया जा सकता, तो हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज किसने पढ़वाई थी।
