Gyanvapi Case: मध्यस्थता पर हिंदू पक्ष तैयार, मुस्लिम पक्ष पर सुप्रीम कोर्ट की पहल ठुकराने का आरोप
वाराणसी, 14 जुलाई। ज्ञानवापी विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्यस्थता की पहल के बाद वाराणसी में एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हिंदू पक्ष के वादकारियों ने कहा है कि वे जिला न्यायालय में होने वाली मध्यस्थता संबंधी बैठक में शामिल होंगे। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष और ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति इस पहल को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
हिंदू पक्ष के वादी सोहन लाल आर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से उठाया गया यह कदम सकारात्मक है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह विवाद सुलझाने की दिशा में एक अच्छा प्रयास है, लेकिन मुस्लिम पक्ष इसमें शामिल नहीं होना चाहता, जो सामाजिक सद्भाव के लिहाज से उचित नहीं है।
सोहन लाल आर्य ने अपने दावे के समर्थन में कहा कि ज्ञानवापी परिसर में मौजूद कुछ संरचनात्मक और धार्मिक प्रतीकों को वे मंदिर होने के संकेत मानते हैं। उन्होंने कहा कि यही उनके प्रमुख साक्ष्य हैं। हालांकि, ये हिंदू पक्ष के दावे हैं, जिन पर अंतिम निर्णय न्यायालय को करना है।
मुस्लिम पक्ष पर लगाए आरोप
सोहन लाल आर्य ने यह भी कहा कि वाराणसी जिला न्यायालय और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वक्फ बोर्ड तथा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 से जुड़े मामलों में मुस्लिम पक्ष को झटका लग चुका है। उनके अनुसार, अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इसी कारण मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता से बच रहा है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह अपने कानूनी अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार न्यायालय में अपना पक्ष रख रहा है।
अन्य वादियों ने भी रखी अपनी बात
हिंदू पक्ष की वादी लक्ष्मी देवी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष शुरुआत से ही मामले में बाधाएं उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानवापी स्थल मूल रूप से मंदिर था और बाद में वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया। एक अन्य वादी सीता साहू ने कहा कि उनका विश्वास है कि यह स्थल मंदिर है और वे इसी आधार पर न्यायालय में अपना पक्ष रख रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय या आपसी सहमति से मंदिर हिंदू पक्ष को मिल जाता है तो विवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू पक्ष हमेशा न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता है और किसी भी वैधानिक निर्णय का पालन करेगा।
क्या है ज्ञानवापी विवाद?
ज्ञानवापी मामला वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और उससे सटे ज्ञानवापी परिसर से जुड़ा लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद है। हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्ष 1669 में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया था। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इन दावों से असहमत है और प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 1991 का हवाला देते हुए स्थल के धार्मिक स्वरूप में किसी भी बदलाव का विरोध करता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट को लेकर भी दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। मामले में विभिन्न याचिकाएं अभी न्यायालयों में लंबित हैं और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
