अमेरिका-ईरान में समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से पार हुए 11 भारतीय पोत, 10 अब भी इंतजार में
नई दिल्ली, 23 जून। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव व टकराव को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने से भारत को भी अच्छी खबर मिली, जब भारत आने वाले 11 जलपोतों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि 17 जून को MoU पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद से अब तक कुल 11 जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग को पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार, भारतीय झंडे वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी के विभिन्न क्षेत्रों में संचालन कर रहे हैं जबकि हाल ही में दो अतिरिक्त जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंच गए हैं।
रणधीर जायसवाल ने जहाजों की विस्तृत सूची साझा करते हुए कहा कि इन 11 जहाजों में तीन भारतीय झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक में 2,85,000 मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी झंडे वाला एलपीजी वाहक, एक विदेशी झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर और खाद्यान्न (फर्टिलाइजर) से लदे छह विदेशी झंडे वाले भारी मालवाहक पोत भी शामिल हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शेष भारतीय झंडे वाले जहाज भी शीघ्र ही होर्मुज पार कर सकेंगे और निर्धारित समय पर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जाएंगे।
ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाने के प्रभाव और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर एक प्रश्न के जवाब में जायसवाल ने स्पष्ट किया, ‘हम पश्चिम एशिया की समस्त गतिविधियों पर बारीकी से और सतर्क नजर रख रहे हैं। जहां तक हमारी ऊर्जा आपूर्ति का प्रश्न है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों को किफायती कीमतों पर पर्याप्त और विविध स्रोतों से ऊर्जा उपलब्ध हो सके। यह हमारी निरंतर और सुसंगत नीति रही है।’
वहीं, फलस्तीन के साथ भारत के संबंधों पर पूछे गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा, ‘दोनों देशों के बीच दशकों पुराने घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हमारी विकास साझेदारी रूपरेखा के तहत हमने फलस्तीन में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इसके अलावा, हमने कई मौकों पर फलस्तीनी लोगों को मानवीय सहायता भी प्रदान की है। हम भविष्य में भी इस सहायता और सहयोग को जारी रखेंगे।’
भारत-संयुक्त अरब अमीरात (UAE) रक्षा साझेदारी पर एक अन्य प्रश्न के जवाब में जायसवाल ने कहा कि यूएई के साथ भारत का रणनीतिक संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुआयामी है। हाल के वर्षों में इस संबंध में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यास और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान लगातार बढ़ रहे हैं।
