मुंबई, 7 जुलाई। महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी कर आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं और अन्य साहित्य के प्रकाशन, प्रसार और उपलब्धता पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने इन प्रकाशनों की सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का भी आदेश दिया है।
एटीएस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस), खुफिया एजेंसियों और साइबर निगरानी से मिली रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ कट्टरपंथी साहित्य और डिजिटल सामग्री का लगातार प्रसार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह सामग्री हिंसक उग्रवाद का महिमामंडन करती है, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करती है और आतंकवादी संगठनों में भर्ती को बढ़ावा देने का माध्यम बन रही है।
संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए बताया खतरा
राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है कि प्रतिबंधित सामग्री भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। सरकार के अनुसार, इन प्रकाशनों में हिंसक जिहाद और चरमपंथ का प्रचार, वैचारिक कट्टरता को बढ़ावा देने तथा देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने वाली सामग्री शामिल है।
एटीएस ने सरकार को भेजी थी सिफारिश
मुंबई एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को राज्य सरकार को पत्र भेजकर कुछ समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों और अन्य प्रकाशनों को जब्त करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि ये सामग्री गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी है तथा इनके प्रसार पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
बीएनएसएस की धारा 98(1) के तहत जारी हुई अधिसूचना
एटीएस की रिपोर्ट और खुफिया इनपुट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 98(1) के तहत अधिसूचना जारी की है। इसके तहत सूचीबद्ध सभी 114 प्रकाशनों पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है और उनकी प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया गया है।
