नई दिल्ली, 15 जुलाई। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले 17 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी की है और दोनों सरकारों से 24 घंटे (गुरुवार तक) में जवाब दाखिल करने को कहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि जरूरत पड़े तो उन्हें फोर्स-फीडिंग के जरिए तरल आहार, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्व दिए जाएं।
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि लगातार भूख हड़ताल की वजह से वांगचुक की हालत तेजी से बिगड़ रही है और यदि समय रहते इलाज नहीं मिला तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है
याचिका के अनुसार सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और उनका ब्लड प्रेशर 109/70 तक पहुंच गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो यह देश और दुनिया दोनों के लिए बेहद दुखद और शर्मनाक होगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, CJP के बैनर तले 28 जून से भूख हड़ताल
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहा है। संगठन की मांग है कि कथित नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, शिक्षा व्यवस्था में सुधार किए जाएं और पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।
पिछले कुछ दिनों में वांगचुक की कमजोर हालत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें डॉक्टर लगातार उनकी जांच करते नजर आ रहे हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का कहना है कि वांगचुक को चलने-फिरने और यहां तक कि खड़े होने में भी काफी दिक्कत हो रही है। अब इस मामले में सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर है।

