BCI पर भड़के CJI सूर्यकांत : नालसार मामले में लॉ छात्रों-शिक्षकों पर दंडात्मक काररवाई पर रोक

नई दिल्ली, 14 अगस्त। भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। इसी क्रम में शीर्ष अदालत ने NALSAR के लॉ छात्रों व शिक्षकों पर संभावित काररवाई पर भी रोक लगा दी है।

दरअसल, सीजेई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष शुक्रवार को बीसीआई द्वारा नालसार यूनिवर्सिटी को भेजे गए पत्रों का मामला उठा। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई। सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने कोर्ट को बताया कि बीसीआई को किसी यूनिवर्सिटी में क्या हो रहा है, उससे कोई लेना-देना नहीं है।

‘BCI की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है, यह छात्रों और मेरे बीच संवाद’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘बीसीआई की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है। यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है। वे कौन होते हैं इस मुद्दे को उठाने वाले? यह पूरी तरह अनावश्यक है।’ सीजेआई ने कहा कि अपने छात्र जीवन में वह भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। यदि छात्र गलत भी हों तब भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है। बीसीआई का इसमें कोई काम नहीं है। युवा उम्र में कोई व्यक्ति गलत बयान दे, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे विरोध करने का अधिकार नहीं है।’

सीजेआई के अपमान के खिलाफ बीसीआई ने उठाया था कदम

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों उक्त यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI की भागीदारी के खिलाफ कथित तौर पर चलाए गए एक संगठित अभियान के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों व जानकारियों का बीसीआई ने संज्ञान लिया और सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश जारी कर दिया कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट का वकील के तौर पर एनरोलमेंट (पंजीकरण) अगले आदेश तक रोक दें। बार काउंसिल ने इसके साथ ही यूनिवर्सिटी से तीन दिनों के भीतर तथ्यों पर आधारित एक प्रमाणित रिपोर्ट भी मांगी थी।

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सुप्रीम कोर्ट की नोटिस के साथ ही बीसीआई ने वापस लिया सर्कुलर

फिलहाल मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी की और अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि किसी भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी या लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक काररवाई नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान बीसीआई ने नोटिस स्वीकार की। कोर्ट को बताया गया कि लंबित सर्कुलर वापस ले लिया गया है।

सीजेआई ने सुनवाई के दौरान छात्रों को संबोधित भी किया

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पत्रों में जिन घटनाओं का जिक्र है, उनके संबंध में NALSAR के छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक काररवाई नहीं की जाएगी। सीजेआई ने सुनवाई के दौरान छात्रों को संबोधित भी किया।

बीसीआई को दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश

उन्होंने छात्रों से कहा कि सभी अपना नामांकन कराएं और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हों। उन्होंने कहा कि छात्रों को लीगल एड कोर्स के लिए भी पैनल में शामिल किया जाएगा। सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने बीसीआई को दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। तब तक विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों को राहत मिली है।

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