कांग्रेस ने केंद्रीय बजट को नकारा, राहुल गांधी बोले- भारत के वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई

नई दिल्ली, 1 फरवरी। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 को यह कहते हुए नकार दिया है कि इसमें देश के सामने व्याप्त संकटों से आंख मूंद ली गई है और और यह बजट आर्थिक व राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्रीय बजट में भारत के सामने मौजूद वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने X पर पोस्ट किया, ‘युवाओं के पास नौकरी नहीं है, विनिर्माण गिर रहा है, निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत घट रही है, किसान संकट में हैं, आसन्न वैश्विक झटके, सभी को नजरअंदाज कर दिया गया।’ उन्होंने दावा किया कि यह एक ऐसा बजट है, जिसमें चीजों को दुरुस्त करने के बजाय वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई।

चिदंबरम बोले – बजट आर्थिक, राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता

वहीं पूर्व वित्त मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका भाषण तथा बजट आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरा नहीं उतरते। उन्होंने यह कटाक्ष भी किया कि सीतारमण ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण को नहीं पढ़ा या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया।

बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता

चिदंबरम ने कहा, ‘आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो कुछ सुनने को मिला, उससे अर्थशास्त्र का हर छात्र अवश्य ही स्तब्ध रह गया होगा। बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता। मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए। इनका जिक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया था।’

चिदंबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘मुझे संदेह है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं। यदि उन्होंने पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने उसे पूरी तरह से दरकिनार करने का फैसला कर लिया है।’

बजट स्पीच में हमें बहुत कम डिटेल्स मिलीं, 3-4 हेडलाइंस थीं – शशि थरूर

उधर हालिया महीनों में अन्यान्य मुद्दों पर पार्टी से भिन्न राय रखने वाले तिरुवनंतपुरम के कांक्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि हमें बहुत कम डिटेल्स मिलीं। 3-4 हेडलाइंस थीं। लेकिन हम ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का इंतजार कर रहे थे। वह कहां है? हम इसे केरल में चाहते थे। हमारे यहां आयुर्वेद की बहुत पुरानी परंपरा है। लेकिन हमने केरल का नाम नहीं सुना।’

शशि थरूर ने आगे कहा, ‘हमने मछुआरों और नारियल के नाम सुने… वह केरल हो सकता है…लेकिन जब उन्होंने शिप रिपेयर की बात की तो उन्होंने वाराणसी और पटना का नाम लिया, लेकिन केरल का नहीं। यह थोड़ा हैरान करने वाला है। शायद बजट डॉक्यूमेंट में और डिटेल्स हों। मैंने अभी उसे पढ़ा नहीं है। स्पीच में बहुत कम डिटेल्स थीं।’

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