दिल्ली के रिहायशी क्षेत्रों में 17.5 मीटर से ऊपर सभी निर्माण अवैध, किया जाएगा सील
नई दिल्ली, 5 जून। राष्ट्रीय राजधानी में मालवीय नगर अग्निकांड जैसी भयावह घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा अनाधिकृत निर्माणों, अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली में ग्राउंड फ्लोर समेत चार मंजिल (17.5 मीटर) से ऊपर चल रहे सभी अवैध निर्माणों को सील किया जाएगा।
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने त्वरित काररवाई के दिए निर्देश
दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ऐसे निर्माण कार्य को चिह्नित करने के लिए स्पेशल, सब-डिविजनल और जिला स्तर की टास्क फोर्स को निगरानी और त्वरित काररवाई के निर्देश दिए गए हैं। हर दिन की प्रगति रिपोर्ट डिविजनल कमिश्नर के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।
‘अवैध निर्माण मुक्त और सुरक्षित दिल्ली हमारी प्राथमिकता’
दिल्ली सचिवालय में शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मंत्री आशीष सूद ने कहा, ‘अब अवैध निर्माण मुक्त और सुरक्षित दिल्ली हमारी प्राथमिकता है। अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।’
ऊंची इमारतों की विशेष निगरानी
आशीष सूद के अनुसार मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी नियमों के विरुद्ध निर्माण कार्य चल रहा हो, वहां तत्काल निर्माण रोकने, प्राथमिकी दर्ज करने तथा भवन स्वामी, बिल्डर या कॉलोनाइजर के विरुद्ध कानूनी काररवाई करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी
उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। पुरानी ऊंची इमारतों की सुरक्षा समीक्षा के निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि जिन इमारतों में अनुमति संबंधी उल्लंघन पाए जाएं, वहां ऊपरी मंजिलों को खाली कराने, सीलिंग और आवश्यक बंदी की काररवाई की जाए। उन्होंने एमसीडी को भवन उपविधियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
फिक्स्ड ग्लास विंडो पर रोक और नई नीतियां
अग्नि सुरक्षा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने फिक्स्ड ग्लास वाली खिड़कियों को गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि सभी भवनों में खुलने योग्य खिड़कियां और बालकनियां सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना था कि आग लगने की स्थिति में यही व्यवस्थाएं लोगों को बाहर निकलने या बचाव दलों द्वारा बचाए जाने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमेटिक लॉकिंग सिस्टम की समीक्षा कर नई नीति बनाने की आवश्यकता भी जताई।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिन भवनों के पास वैध कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें पानी और बिजली के नए कनेक्शन अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जाए। साथ ही वर्तमान में चल रहे सभी अवैध निर्माणों तथा उनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की फोटो सहित विस्तृत सूची तैयार कर तत्काल सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए।
दोषी अफसरों की संपत्ति व कॉलोनाइजर, बिल्डर, ऑनर से भी होगी वसूली
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि राजस्व वसूली अधिनियम-1890 के तहत सरकार को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन तथा संपत्तियों से की जाएगी. साथ ही बिल्डर, ऑनर व कॉलोनाइजर्स के बैंक अकांउट व चल अचल संपत्ति को फ्रीज व अटैच किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बच निकलने की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही को और कठोर बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की एपीएआर (वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट) में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज की जाएगी, जिसका प्रभाव उनके भविष्य के करिअर पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल अधीनस्थ कर्मचारियों पर काररवाई करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
