नितिन गडकरी को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत : E20 पेट्रोल मुद्दे पर सभी फेक पोस्ट हटाने का आदेश
मुंबई, 5 जुलाई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने E20 पेट्रोल के मुद्दे पर ट्रोलिंग के शिकार हो रहे केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत प्रदान की और सोशल मीडिया व इंटरनेट से गडकरी से जुड़े बदनाम करने वाले सभी कंटेंट तुरंत हटाने का आदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि गडकरी ने इस मामले में मेटा, एक्स, गूगल, यूट्यूब और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) समेत कई पार्टियों के खिलाफ 11 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा करते हुए मानहानि का केस किया था। उनकी अर्जी पर बुधवार को जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की अध्यक्षता वाली एकल पीठ के सामने सुनवाई हुई।
सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की इस तरह खुलेआम आलोचना गलत
हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पहली नजर में गडकरी के दावे में दम था और जिस कंटेंट पर सवाल उठाया गया, वह वाकई में आपत्तिजनक हैं। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की इस तरह खुलेआम आलोचना गलत है। वहीं गूगल और मेटा ने आपत्तिजनक कंटेंट को अपनी मर्जी से हटाने की इच्छा जताई। इसके बाद कोर्ट ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसे सभी कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट ने आगे कहा कि यदि भविष्य में ऐसा ही कंटेंट प्रसारित होता है तो याचिकाकर्ता सीधे इन कम्पनियों से संपर्क करके इसे हटाने का अनुरोध कर सकते हैं और कम्पनियां ऐसे अनुरोधों पर काररवाई करने के लिए मजबूर होंगी।
आलोचना उचित सीमा के अंदर हो, सीमाओं को पार करना मंजूर नहीं
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आलोचना उचित सीमा के अंदर होनी चाहिए और उन सीमाओं को पार करना मंजूर नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ऐसे अनुरोधों के बावजूद AI से बना डीपफेक कंटेंट नहीं हटाया जाता तो याचिकाकर्ता फिर से कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
कोर्ट का सुझाव : गूगल व मेटा जैसी कम्पनियों को एक सिस्टम बनाना चाहिए
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गूगल और मेटा जैसी बड़ी कम्पनियों को ऐसी शिकायतों को संभालने और तुरंत समाधान करने के लिए एक सिस्टम बनाना चाहिए, जिससे प्रभावित लोगों को बार-बार कोर्ट जाने की जरूरत न पड़े। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी है।
