वर्चुअल संबोधन में भावुक शेख हसीना बोलीं- ‘दिसम्बर में बांग्लादेश लौटूंगी, वे मुझे जेल में डालें या मार दें’
नई दिल्ली, 5 अगस्त। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वर्ष 2024 में पांच अगस्त को सत्ता से बेदखल किए जाने के ठीक वर्ष बुधवार को अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया। नई दिल्ली में ‘फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शेख हसीना ने अपने भविष्य के कार्यक्रम का खाका पेश किया।
अपने 25 मिनट के ऑडियो भाषण में उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं, फिर भी मैं दिसम्बर में बांग्लादेश वापस जाउंगी। लोगों का समर्थन मेरे लिए बहुत जरूरी है। मौत की सजा, झूठे मुकदमे और दिखावटी सुनवाई मुझे डरा नहीं सकती। मेरे खिलाफ चल रही कानूनी काररवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।’
‘मैंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था’
हसीना ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था। प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने पर उनके पास वहां से निकलने के लिए सिर्फ 30 से 40 मिनट का समय था। तब उन्हें नहीं पता था कि वे देश छोड़कर जा रही हैं। वह अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि देश छोड़ना पड़ा।
हालांकि शेख हसीना अपने वर्चुअल संबोधन की शुरुआत में ही फूट पड़ी। बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा, ‘आज मैं सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के तौर पर बात कर रही हूं।’ हसीना अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हुए भावुक हो गईं, इनमें से ज्यादातर लोगों की हत्या 1975 में ढाका में शेख मुजीब के साथ ही कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था।
2024 में छात्रों का आंदोलन कदापि शांतिपूर्ण नहीं था
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा, ‘पिछले दो सालों से मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को मुश्किलों से जूझते देखा है। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे हमने बनाया था। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी। मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हूं। यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। शुरू से ही, मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए इस मुद्दे को शांति से सुलझाने की कोशिश की। लेकिन सुधार की बात की आड़ में, कुछ संगठित समूह छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश कर रहे थे।’
‘अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई’
शेख हसीना ने कहा, ‘मैं अपने देश से दूर हूं, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई हूं। मैंने और मेरे परिवार ने बांग्लादेश के लिए लड़ाई लड़ी थी। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी।’
छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में सत्ता परिवर्तन की सुनियोजित साजिश
शेख हसीना जब पत्रकारों को संबोधित कर रही थीं तो उनका चेहरा नहीं दिखाया जा रहा था वरन सिर्फ आवाज को लाइव ब्रॉडकास्ट किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 का वह विद्रोह, जिसने उनकी सरकार को गिरा दिया था, असल में छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में किया गया ‘सत्ता परिवर्तन की एक सुनियोजित साजिश’ थी। असली छात्रों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें बहकाया गया, लेकिन ऐसा उन समूहों ने किया जिनका अपना स्वार्थ था। मामला कभी कोटा का था ही नहीं. बल्कि योजना यह थी कि लोगों को सरकार बदलने के लिए उकसाया जाए।
यूनुस के अपने शब्दों ने सच उजागर कर दिया
बकौल शेख हसीना, मोहम्मद यूनुस के अपने शब्दों ने सच उजागर कर दिया। उन्होंने माना कि यह बहुत सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से किया गया ऑपरेशन था। उस आंदोलन का मकसद बैलेट बॉक्स से चुनी गई व्यवस्था से सत्ता छीनना था।
यूनुस ने हत्यारों को सुरक्षा दी
पूर्व पीएम ने बांग्लादेश के पूर्व केयर टेकर मुहम्मद यूनुस का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार का पुलिसकर्मियों के हत्यारों को सुरक्षा (इंडेम्निटी) देने का एक फैसला उनके असली मकसद को जाहिर करता है। हसीना ने कहा, “मैंने इस मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन मुहम्मद यूनुस की ‘गैर-कानूनी अंतरिम सरकार’ ने उसे रोक दिया। अगर उन्हें डर नहीं था तो उन्होंने सच सामने क्यों नहीं आने दिया?”
अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमले हो रहे
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों, जजों, सांस्कृतिक हस्तियों और यहां तक कि रिक्शा चालकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जो लोग मुक्ति संग्राम के पक्ष में खड़े हैं, उन पर हमले हो रहे हैं। वहीं दोषी ठहराए गए उग्रवादियों को रिहा कर दिया गया है।
शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय का संबोधन
शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भी हिंसा खत्म नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि अगस्त, 2024 के विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी हत्याओं का सिलसिला जारी रहा।
लगाया आरोप – ‘एक और पाकिस्तान’ बन गया है बांग्लादेश
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा बताई गई मौतों की संख्या और सरकारी आंकड़ों के बीच अंतर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एक ‘इंडेम्निटी’ उपाय के तहत प्रदर्शनकारियों को छूट दी गई और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से सत्ता से हटने के बाद हुई हिंसा की बारीकी से जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश ‘एक और पाकिस्तान’ बन गया है और कहा कि यह घटनाक्रम भारत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
