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पंजाब : अकाल तख्त ने बेअदबी विरोधी कानून में बदलाव के लिए मान सरकार को दिया एक माह का अल्टीमेटम

Revoi Editor
Last updated: June 30, 2026 7:28 pm
Revoi Editor
Published: June 30, 2026
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चंडीगढ़, 30 जून। अकाल तख्त ने भगवंत मान का अगुआई वाली पंजाब सरकार को एक का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 में सिख धर्मगुरुओं द्वारा सुझाए गए बदलावों के अनुसार संशोधन करे।

अकाल तख्त का हुकमनामा सिखों के लिए बाध्यकारी

अकाल तख्त की ओर से सोमवार को अभूतपूर्व सुनवाई के बाद यह अल्टीमेटम दिया गया, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के सिख मंत्रियों और सभी दलों के सिख विधायकों को तलब किया गया था। उनसे पूछा गया था कि सिखों की सर्वोच्च धार्मिक और सांसारिक संस्था से सलाह लिए बिना यह कानून क्यों पारित किया गया। उल्लेखनीय है कि अकाल तख्त के निर्देश, जिन्हें हुकमनामा कहा जाता है, सिखों के लिए बाध्यकारी माने जाते हैं।

सभी विधायकों ने स्वीकार किया कि गलती हुई थी – अकाल तख्त जत्थेदार

करीब दो घंटे चली चर्चा के अंत में अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि बैठक में शामिल सभी विधायकों ने स्वीकार किया कि कानून पारित करते समय गलती हुई थी और उन्होंने अकाल तख्त के निर्देशों को मान लिया है।

विधानसभा अध्यक्ष बोले – सुझाए गए बदलावों पर सरकार विचार करेगी

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इन बदलावों को लागू करने की सीधी प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त द्वारा सुझाए गए बदलावों पर सरकार विचार करेगी और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

पंजाब सरकार ने 13 अप्रैल को पारित किया था जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक

गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा ने गत 13 अप्रैल को बैसाखी के अवसर पर बुलाए गए विशेष सत्र में जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक पारित किया था। इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सिख गुरु ग्रंथ साहिब को जीवित गुरु मानते हैं।

एक हफ्ते बाद पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस बेअदबी विरोधी विधेयक को मंजूरी दे दी थी। अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ AAP ने इस विधेयक को ‘गेम-चेंजर’ बताया था।

फिलहाल सोमवार की कार्यवाही सिख धार्मिक मामलों से जुड़े कानूनों पर अकाल तख्त के अधिकार के असाधारण प्रदर्शन के रूप में देखी गई। इससे पहले कभी भी अकाल तख्त ने पंजाब के लगभग पूरे सिख राजनीतिक नेतृत्व को, जिसमें मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सत्तारूढ़ दल के विधायक, विपक्षी विधायक और निर्दलीय सदस्य शामिल हों, पंजाब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किसी कानून के मुद्दे पर तलब नहीं किया था।

सीएम भगवंत मान को इसलिए बैठक में नहीं बुलाया गया

चूंकि कथित बेअदबी वीडियो विवाद के संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु विरोधी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया जा चुका है, इसलिए उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया। अकाल तख्त सचिवालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, सुनवाई में AAP के 69 विधायक और मंत्री शामिल हुए। कांग्रेस के 15 विधायक, शिरोमणि अकाली दल के दो विधायक और निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। चार गैर-सिख मंत्रियों ने लिखित स्पष्टीकरण भेजा जबकि दो गैर-सिख विधायक स्वेच्छा से बैठक में शामिल हुए।

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