नई दिल्ली, 5 अगस्त। NEET UG पेपर लीक मामले में पिछले माह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके बड़ी मुश्किल में फंसते प्रतीत हो रहे हैं। दरअसल, दिपके के खिलाफ अधिवक्ता रिंकी चटर्जी की शिकायत पर Zero FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में एक नाबालिग की भागीदारी हुई, जिसके आधार पर दिपके के खिलाफ POCSO Act सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत काररवाई की मांग की गई है।
क्या है Zero FIR?
Zero FIR ऐसी FIR होती है, जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज किया जा सकता है, चाहे घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई हो या नहीं। इसका उद्देश्य संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर तत्काल काररवाई सुनिश्चित करना है। बाद में इसे संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को स्थानांतरित किया जाता है। शिकायतकर्ता ने इसी व्यवस्था का उपयोग करते हुए मामला दर्ज कराया। इससे जांच शुरू करने में देरी नहीं होती। हालांकि Zero FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। आगे की जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही पुलिस निर्णय लेती है।
गौरतलब है कि POCSO Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया विशेष कानून है और दिपके के खिलाफ की गई शिकायत का आधार प्रदर्शन में कथित रूप से एक नाबालिग की भागीदारी बताया गया है। शिकायत है कि कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन वाली जगह पर यौनांगो से जुड़ी अश्लील गालियों और भाषा का भरपूर प्रयोग हुआ। ऐसे में वहां नाबालिग या अल्प व्यस्क बच्चियों को कैसे आने दिया गया ? वहां उन्हें कौन लाया?
शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे बाल संरक्षण संबंधी कानूनों का उल्लंघन हुआ। अभिजीत दिपके वहां आयोजक की भूमिका में थे। उनकी बड़ी भूमिका बनती है। वैसे यहां यह बताना सही होगा कि किसी मामले में POCSO Act की धाराएं लागू होंगी या नहीं, यह जांच के तथ्यों पर निर्भर करता है। केवल शिकायत में किसी कानून का उल्लेख हो जाने से उसका स्वतः लागू होना सिद्ध नहीं माना जाता।
दिपके ने इसे राजनीति प्रेरित काररवाई बताया
वहीं अंग्रेजी समाचार पत्र TOI की रिपोर्ट के अनुसार अभिजीत दिपके ने सार्वजनिक रूप से इन मामलों को राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन करने वालों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में था। हालांकि उनके इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक स्तर पर नहीं हुई है। पुलिस ने मामले की जांच जारी रहने की बात कही है।
