नई दिल्ली, 10 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों से सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनने, कल्याणकारी विचारों को अपनाने और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने पोस्ट में लिखा, “हम सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं। स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें तथा सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार कर राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाएं।”
इसके साथ पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक भी साझा किया-
“भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥”
7 अगस्त को भी शेयर किया था सुभाषित
इससे पहले प्रधानमंत्री ने 7 अगस्त को भी सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा था— “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥” इसका अर्थ है कि चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों से कुमुदिनी को प्रकाशित नहीं करता, बल्कि यह उसका स्वाभाविक गुण है। इसी तरह महान और उदार हृदय वाले लोग बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव का हिस्सा होता है।
6 अगस्त को पीएम ने दिया था मातृभूमि सेवा का संदेश
इससे पहले 6 अगस्त को भी प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर संस्कृत श्लोक साझा किया था-
“विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥” इसका संदेश पृथ्वी और मातृभूमि की सेवा से जुड़ा है। प्रधानमंत्री की ओर से साझा किए गए अर्थ में कहा गया कि जिस धरती पर श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां पैदा होती हैं, वह पृथ्वी माता विस्तृत और स्थिर रहे। साथ ही विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे सद्गुणों से पोषित मातृभूमि की सदैव सेवा करने का संकल्प लिया जाए।
