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युद्ध के बीच फर्जी वीडियो फैलाने पर काररवाई : यूएई में 19 भारतीय नागरिकों सहित 35 की गिरफ्तारी के आदेश

दुबई, 15 मार्च। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो फैलाने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। इनमें 19 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

UAE की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार सभी आरोपितों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है और उनके मामलों की जल्द सुनवाई की जाएगी। UAE के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी के दौरान यह काररवाई की गई।

जांच में पाया गया कि कुछ लोग इंटरनेट पर फर्जी जानकारी और गुमराह करने वाले वीडियो फैला रहे थे, जिससे देश में डर और अफरा-तफरी फैल सकती थी और स्थिरता को नुकसान पहुंच सकता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया है और सभी ने अलग-अलग तरह के काम किए।

पहले ग्रुप ने असली वीडियो शेयर किए

पहला समूह 10 लोगों का है। इन लोगों ने असली वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर किए, जिनमें यूएई के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य थे। साथ ही उन्होंने लोगों की भीड़ के वीडियो बनाकर उसमें ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े, जिससे यह लगे कि देश पर हमला हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी सामने आ सकती थी। इस समूह में पांच भारतीय, एक पाकिस्तानी, एक नेपाली, दो फिलिपीनी और एक मिस्री नागरिक शामिल हैं।

दूसरे ग्रुप ने AI वीडियो शेयर किए

दूसरा समूह सात लोगों का है। इन लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी वीडियो बनाए या दूसरे देशों की घटनाओं के वीडियो को यूएई का बताकर फैलाया। इन वीडियो में विस्फोट, मिसाइल हमले और झंडों के साथ नकली दृश्य दिखाए गए, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके। इस समूह में पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं।

तीसरा समूह छह लोगों का है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसे देश की सैन्य काररवाइयों और नेताओं की तारीफ करते हुए पोस्ट और वीडियो शेयर किए, जिसे यूएई के हितों के खिलाफ माना जा रहा है। इस समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल हैं। इसके अलावा दो और भारतीयों पर भी इसी तरह के आरोप लगे हैं। इससे पहले शनिवार को 10 लोगों के खिलाफ भी काररवाई शुरू की गई थी।

कम से कम एक वर्ष की जेल और एक लाख दिरहम का जुर्माना

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ऐसे अपराधों के लिए कम से कम एक साल की जेल और एक लाख दिरहम जुर्माना हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार कुछ वीडियो में बच्चों की भावनाओं का भी इस्तेमाल किया गया और झूठे तरीके से यह दिखाया गया कि यूएई में बड़े हमले या आग लगी हुई है। सरकार का कहना है कि इस तरह की गलत जानकारी देश की सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है।

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